शुभ संकेत: इस बार 10 दिनों की होगी मां दुर्गा की आराधना, सप्तमी दो दिन रहने से बढ़ी नवरात्र की अवधि

सुख-समृद्धि और खुशहाली का संकेत लेकर इस बार मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी। शारदीय नवरात्र की शुरुआत रविवार, 11 अक्टूबर से हो रही है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रविवार को नवरात्र आरंभ होने पर मां दुर्गा का वाहन हाथी होता है, जिसे सुख-समृद्धि और संपन्नता का प्रतीक माना जाता है।
🌸20 अक्टूबर को दशहरा
इस बार मां की आराधना नौ नहीं, बल्कि 10 दिन की होगी। सप्तमी तिथि दो दिन रहने के कारण नवरात्र की अवधि एक दिन बढ़ गई है। 19 अक्टूबर को अष्टमी व महानवमी और 20 अक्टूबर को दुर्गा विसर्जन के साथ दशहरा मनाया जाएगा।
उत्तराखंड विद्वत सभा के प्रदेश प्रवक्ता विपिन डोभाल के अनुसार, 11 अक्टूबर को प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना के साथ नवरात्र का शुभारंभ होगा। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाएगी।
इसके बाद मां ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी और कालरात्रि की आराधना होगी। नवरात्र के दौरान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे। शहर के सभी मंदिरों में भी नवरात्र को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं।
🌸हाथी पर आगमन को माना जाता है शुभ
ज्योतिषाचार्य डा. सुशांत राज के अनुसार, धार्मिक मान्यताओं में नवरात्र के आरंभ और समापन के वार के आधार पर मां दुर्गा के आगमन और प्रस्थान के वाहन निर्धारित होते हैं। इस बार रविवार को नवरात्र शुरू होने के कारण मां दुर्गा का वाहन हाथी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, हाथी पर मां का आगमन अच्छी वर्षा, कृषि समृद्धि, सुख-शांति और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।
🌸सप्तमी दो दिन, 10 दिन तक चलेगी आराधना
इस बार तिथियों की विशेष स्थिति के कारण शारदीय नवरात्र 10 दिन के होंगे।
17 अक्टूबर को सप्तमी तिथि पूरे दिन रहेगी और 18 अक्टूबर को सूर्योदय के समय भी सप्तमी होने के कारण इस दिन भी सप्तमी तिथि रहेगी, जो सुबह 10:53 बजे समाप्त होगी।
19 अक्टूबर को दोपहर 12:52 बजे तक अष्टमी और इसके बाद नवमी तिथि शुरू होगी।
नवमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12:27 बजे तक रहेगी व इसके बाद दशहरा पूजन होगा।
🌸शारदीय नवरात्र की प्रमुख तिथियां
🌸तिथि: पर्व एवं तिथि समाप्ति
11 अक्टूबर: प्रतिपदा, रात 9:30 बजे तक
12 अक्टूबर: द्वितीया, रात 9:10 बजे तक
13 अक्टूबर: तृतीया, रात 11:24 बजे तक
14 अक्टूबर: चतुर्थी, रात 1:09 बजे तक
15 अक्टूबर: पंचमी, रात 3:21 बजे तक
16 अक्टूबर: षष्ठी, सुबह 5:23 बजे
17 अक्टूबर: सप्तमी, पूरे दिन
18 अक्टूबर: सप्तमी, सुबह 10:53 बजे तक
19 अक्टूबर: अष्टमी, दोपहर 12:52 बजे तक
20 अक्टूबर: नवमी, दोपहर 12:27 बजे तक