नंदादेवी मेले की तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार, व्यवस्थाओं एवं मेले के सफल संपादन के लिए मंदिर समिति ने जिलाधिकारी से की मुलाकात; लंबित अनुदान जारी करने और महाअष्टमी पर प्रदेशव्यापी अवकाश घोषित करने की उठाई मांग

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नंदादेवी मेले की तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार, व्यवस्थाओं एवं मेले के सफल संपादन के लिए मंदिर समिति ने जिलाधिकारी से की मुलाकात; लंबित अनुदान जारी करने और महाअष्टमी पर प्रदेशव्यापी अवकाश घोषित करने की उठाई मांग

 

अल्मोड़ा।* आगामी माँ नंदादेवी महोत्सव एवं ऐतिहासिक नंदादेवी मेले की तैयारियों को लेकर माँ नंदादेवी मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी से भेंट की। समिति ने मेले के सफल एवं भव्य आयोजन के लिए प्रशासन से आवश्यक सहयोग प्रदान करने का आग्रह करते हुए विभिन्न महत्वपूर्ण मांगों का एक ज्ञापन सौंपा।
बैठक के दौरान समिति ने जिलाधिकारी को बताया कि नंदादेवी मेले में प्रतिवर्ष देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पर्यटक एवं स्थानीय लोग शामिल होते हैं। इस विशाल जनसमूह की सुगमता के लिए सुरक्षा, यातायात, पेयजल और स्वच्छता जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं को समय से दुरुस्त करने के सम्बन्ध में विस्तृत वार्ता की गई।

 

लंबित अनुदान जारी करने और सार्वजनिक अवकाश की मांग
बैठक में समिति ने पुरजोर ढंग से मांग उठाई कि सांस्कृतिक विभाग एवं पर्यटन विभाग द्वारा वर्ष 2024 तथा वर्ष 2025 के लिए स्वीकृत अनुदान की लंबित धनराशि का शीघ्र भुगतान कराया जाए। समिति का कहना था कि समय पर बजट उपलब्ध होने से मेले की तैयारियों और सांस्कृतिक आयोजनों को अधिक व्यवस्थित व भव्य रूप से संपन्न कराया जा सकेगा।
इसके अलावा, समिति ने एक बेहद महत्वपूर्ण मांग रखते हुए कहा कि 19 सितंबर 2026 को महाअष्टमी के पावन अवसर पर पूरे उत्तराखंड में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाए। इस संबंध में जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक औपचारिक प्रस्ताव भी भेजा गया। समिति के पदाधिकारियों का कहना था कि माँ नंदादेवी उत्तराखंड की अटूट लोकआस्था और सांस्कृतिक विरासत का मुख्य केंद्र हैं, इसलिए महाअष्टमी पर पूरे प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश होने से राज्यभर के श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना और पारंपरिक मेले में शामिल होने का अवसर मिल सकेगा।

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मेले का गौरवशाली ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व
अल्मोड़ा का माँ नंदादेवी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड के समृद्ध इतिहास और अटूट जन-आस्था का जीवंत प्रतीक है।

 

 

चंद राजवंश से जुड़ा इतिहास ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, कुमाऊं में नंदादेवी मेले और पूजा की शुरुआत चंद राजवंश के राजा कल्याण चंद के शासनकाल में हुई थी। वे गढ़वाल (बधाणगढ़) से माँ नंदा की स्वर्ण प्रतिमा को जीतकर अल्मोड़ा लाए थे और उन्होंने मल्ला महल (वर्तमान कलेक्ट्रेट परिसर) में माँ नंदा को स्थापित किया था। बाद में, ब्रिटिश काल के दौरान कुमाऊं के कमिश्नर जॉर्ज विलियम ट्रेल के कार्यकाल में इस मूर्ति को वर्तमान नंदादेवी मंदिर परिसर में स्थानांतरित किया गया, जिसके बाद से यह मेला इसी भव्य प्रांगण में अनवरत रूप से आयोजित होता आ रहा है।

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सांस्कृतिक धरोहर का झरोखा यह मेला कुमाऊं और गढ़वाल की सांस्कृतिक एकता का सेतु माना जाता है। मेले के दौरान होने वाले पारंपरिक छोलिया नृत्य, झोड़ा, चांचरी और लोक गायन उत्तराखंड की लोक कलाओं को जीवंत रखते हैं। केले के पत्तों से माँ नंदा-सुनंदा की भव्य मूर्तियों का निर्माण और डोला यात्रा इस मेले के मुख्य आकर्षण हैं, जो सदियों पुरानी परंपरा को दर्शाते हैं।

 

प्रशासन ने दिया पूर्ण सहयोग का आश्वासन
जिलाधिकारी अल्मोड़ा ने मंदिर समिति की सभी बातों को ध्यानपूर्वक सुना और आश्वस्त किया कि माँ नंदादेवी मेले के सफल संपादन में जिला प्रशासन का पूर्ण सहयोग रहेगा। उन्होंने संबंधित विभागों को भी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद करने के निर्देश देने की बात कही।

 

जिलाधिकारी से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में मंदिर समिति के अध्यक्ष मनोज वर्मा, सचिव मनोज सनवाल, मुख्य संयोजक तारा चन्द्र जोशी, हरीश कनवाल, पार्षद अमित साह, पार्षद अर्जुन बिष्ट, पार्षद अभिषेक जोशी, पार्षद वंदना वर्मा सहित कई गणमान्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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