देहरादून से दिल्ली तक हलचल: बीजेपी नेताओं की सार्वजनिक दावेदारी पर संगठन, कांग्रेस ने कसा तंज।
चुनावी आहट के साथ ही बीजेपी में बगावती सुर, क्या ‘अनुशासन’ पर भारी पड़ रही टिकट की चाह?
‘पार्टी विद द डिफरेंस’ में घमासान: बीजेपी में शह-मात का खेल, 2027 से पहले अपनों ने ही खोलीं राहें!
देहरादून से दिल्ली तक हलचल: बीजेपी नेताओं की सार्वजनिक दावेदारी पर संगठन, कांग्रेस ने कसा तंज।
बीजेपी खुद को अनुशासित और अनुशासित कार्यकर्ताओं की पार्टी कहती आई है, लेकिन इन दिनों पार्टी के अंदरूनी हालात कुछ और ही बयां कर रहे हैं। विधानसभा चुनाव की आहट से पहले ही उत्तराखंड बीजेपी में टिकट की दावेदारी को लेकर सिर-फुटौव्वल का दौर शुरू हो चुका है। नेता खुलकर एक-दूसरे की सीटों पर दावेदारी कर रहे हैं और बयानों के तीर चलाए जा रहे हैं। आखिर क्यों बीजेपी में यह घमासान मचा हुआ है और इस पर विपक्ष क्या चुटकी ले रहा है? देखिए हमारी इस खास रिपोर्ट में…!
बीजेपी खुद को ‘पार्टी विद द डिफरेंस’ और बेहद अनुशासित दल करार देती है। आमतौर पर जब विपक्षी पार्टियों में घमासान मचता है, तो भाजपा के नेता जमकर जुबानी हमले बोलते हैं। लेकिन अब चुनावी साल से ठीक पहले तस्वीर उलट नजर आ रही है। बीजेपी के अपने ही नेता टिकट की दावेदारी को लेकर आमने-सामने आ गए हैं। कई पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता अब सीधे तौर पर पार्टी के ही वर्तमान विधायकों की सीटों पर खुलकर दावेदारी ठोक रहे हैं।
ताजा मामला उत्तराखंड बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक कुलदीप कुमार का है। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें वह विकासनगर सीट से बीजेपी विधायक मुन्ना सिंह चौहान पर इशारे-इशारों में निशाना साधते दिख रहे हैं। कुलदीप कुमार का साफ कहना है कि विकासनगर एक सामान्य सीट है, ऐसे में किसी जनजातीय व्यक्ति को वहां से प्रत्याशी बनाने का कोई औचित्य नहीं बनता। वे खुलकर विकासनगर से अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं और उनका कहना है कि उन्होंने संगठन को भी इससे अवगत करा दिया है।
बाइट: कुलदीप कुमार, पूर्व विधायक, भाजपा
यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले देहरादून के पूर्व मेयर और पार्टी के वरिष्ठ नेता सुनील उनियाल गामा भी मसूरी विधानसभा सीट से अपनी दावेदारी खुलकर जाहिर कर चुके हैं। इस पूरे मामले पर पार्टी के वरिष्ठ नेता बचाव की मुद्रा में हैं। बीजेपी नेताओं का तर्क है कि संयमित दायरे में रहकर दावेदारी करना गलत नहीं है, लेकिन खुले मंचों से बयानबाजी करना सही नहीं माना जा सकता। अंतिम फैसला पार्टी का पार्लियामेंट्री बोर्ड ही करेगा।
बाइट: विनोद चमोली, वरिष्ठ विधायक, भाजपा
बीजेपी के इस अंदरूनी घमासान और बयानों की बारिश पर अब कांग्रेस भी चुटकी ले रही है। कांग्रेस का कहना है कि जो पार्टी खुद को अनुशासित होने का दम भरती थी, आज उसके नेता टिकट पाने के लिए सोशल मीडिया पर गुटबाजी कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब उनकी पार्टी में कोई बात होती है तो बीजेपी उसे ‘गुटबाजी’ कहती है, लेकिन आज जब उनके खुद के नेता खुलेआम अनुशासन तोड़ रहे हैं, तो बीजेपी इसे ‘आंतरिक लोकतंत्र’ का नाम देकर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है।
बाइट: डॉक्टर प्रतिमा सिंह, प्रदेश प्रवक्ता, कांग्रेस
साल 2017 से लगातार उत्तराखंड की सत्ता पर काबिज बीजेपी अब 2027 में हैट्रिक लगाने का सपना देख रही है। लेकिन जिस तरह से चुनावी मौसम शुरू होने से पहले ही पार्टी के भीतर टिकट की होड़ और बगावती सुर दिखने लगे हैं, उसने संगठन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अगर बीजेपी ने समय रहते इस अंदरूनी कलह और महत्वाकांक्षाओं पर नकेल नहीं कसी, तो आने वाले विधानसभा चुनाव में उसकी राह बेहद कांटों भरी हो सकती है।