Intresting News:देवभूमि की दिव्य धरोहर: क्यों बेहद खास हैं अल्मोड़ा के ये 4 ऐतिहासिक मंदिर?

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देवभूमि उत्तराखंड का कण-कण देवी-देवताओं के वास और पवित्रता से भरा है। लेकिन जब बात आस्था, प्राचीन वास्तुकला और चमत्कारी मंदिरों की आती है, तो कुमाऊं की सांस्कृतिक राजधानी अल्मोड़ा का नाम सबसे ऊपर आता है।

​अल्मोड़ा सिर्फ अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि अपने सदियों पुराने और जागृत मंदिरों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। आज की हमारी इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको ले चलेंगे अल्मोड़ा के उन मुख्य मंदिरों के सफर पर, जिनकी महिमा देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक फैली है।

1. जागेश्वर धाम: 125 मंदिरों का अलौकिक समूह

: अल्मोड़ा शहर से करीब 36 किलोमीटर दूर देवदार के घने जंगलों के बीच स्थित है जागेश्वर धाम। 125 से अधिक छोटे-बड़े पत्थरों के मंदिरों का यह समूह वास्तुकला का एक बेजोड़ नमूना है। इसे शिव के पांचवे ज्योतिर्लिंग (नागेशं दारुकावने) के रूप में पूजा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव और सप्तऋषियों ने यहीं पर तपस्या की थी। सावन के महीने में यहाँ भक्तों का तांता लगा रहता है।

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​2. कसार देवी मंदिर: नासा के वैज्ञानिक भी हैरान

: अल्मोड़ा के पास एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित कसार देवी मंदिर न केवल आध्यात्मिक शांति, बल्कि अपने वैज्ञानिक महत्व के लिए भी जाना जाता है। माना जाता है कि कसार देवी मंदिर का क्षेत्र ‘वैन एलन रेडिएशन बेल्ट’ के अंतर्गत आता है, जहाँ धरती की सबसे शक्तिशाली भू-चुंबकीय ऊर्जा (Geomagnetic Field) मौजूद है। यही वजह है कि स्वामी विवेकानंद, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर से लेकर नासा के वैज्ञानिक और विदेशी सैलानी भी यहाँ की अद्भुत मानसिक शांति का अनुभव करने खिंचे चले आते हैं।

​3. चितई गोलू देवता: न्याय के देवता का दरबार

: जब किसी को कहीं से न्याय नहीं मिलता, तो वह रुख करता है चितई गोलू देवता मंदिर का। इन्हें ‘न्याय का देवता’ माना जाता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ भक्त स्टाम्प पेपर, कागज या चिट्ठियों पर अपनी अर्जी लिखकर भगवान के चरणों में चढ़ाते हैं। मन्नत पूरी होने पर यहाँ घंटियाँ चढ़ाई जाती हैं, यही वजह है कि इसे ‘घंटियों वाला मंदिर’ भी कहा जाता है।

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​4. सूर्य मंदिर कटारमल: वास्तुकला का अनूठा चमत्कार

 : कोणार्क के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा सूर्य मंदिर अल्मोड़ा के कटारमल में स्थित है। 9वीं शताब्दी में कत्यूरी राजवंश के राजा कटारमल्ल द्वारा निर्मित इस मंदिर की वास्तुकला देखने लायक है। मुख्य मंदिर के चारों ओर 44 छोटे-छोटे मंदिर बने हैं। इस मंदिर की बनावट ऐसी है कि उगते हुए सूरज की पहली किरण सीधे मंदिर के मुख्य गर्भगृह पर पड़ती है।

अल्मोड़ा के ये मंदिर सिर्फ पत्थरों की इमारतें नहीं हैं, बल्कि यह हमारी सदियों पुरानी संस्कृति, आस्था और अटूट विश्वास की जीवंत धरोहर हैं। अगर आप भी अध्यात्म और मानसिक सुकून की तलाश में हैं, तो अल्मोड़ा के इन दिव्य दरबारों के दर्शन एक बार जरूर करें।

​अल्मोड़ा से संवाददाता दिव्या नैनवाल नंदा देवी न्यूज़।

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