मौत का सफर या ‘देसी जुगाड़’? उत्तरकाशी में बह गई सड़क, तो JCB के पंजे में बैठकर उफनता नाला पार करने को मजबूर हुए लोग!

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मौत का सफर या ‘देसी जुगाड़’? उत्तरकाशी में बह गई सड़क, तो JCB के पंजे में बैठकर उफनता नाला पार करने को मजबूर हुए लोग!

उत्तरकाशी:* आज के इस आधुनिक और तकनीकी दौर में जब कोई बड़ी मुसीबत सामने आती है, तो इंसान अपनी सूझबूझ से कोई न कोई रास्ता निकाल ही लेता है। लेकिन कभी-कभी यह ‘रास्ता’ बेहद खतरनाक और रूह कँपा देने वाला होता है। सोशल मीडिया पर उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद का एक ऐसा ही चौंकाने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर आप भी दांतों तले उंगलियां दबा लेंगे।

आफत की बारिश और ‘जेसीबी’ का खतरनाक सफर
यह वायरल मामला उत्तरकाशी जनपद की खूबसूरत हर की दून घाटी के ओसला-गंगाड़ क्षेत्र का है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण संपर्क मार्ग का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह से बह गया है। रास्ता बंद होने के कारण ग्रामीणों और वहां घूमने आए पर्यटकों के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया।

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ऐसे में उफनते हुए तेज बहाव वाले नाले को पार करने के लिए लोगों ने एक ऐसा तरीका निकाला जो जितना अनोखा है, उतना ही जानलेवा भी है:

वायरल वीडियो की हकीकत:* सड़क बह जाने के बाद लोग एक किनारे से दूसरे किनारे तक जाने के लिए *JCB मशीन के आगे वाले बकेट (लोहे के पंजे)** में बैठ रहे हैं। इसके बाद ऑपरेटर मशीन को उफनते नाले के बीच ले जाकर लोगों को इस पार से उस पार पहुंचा रहा है। जरा सी चूक और बड़ा हादसा तय है, लेकिन मजबूरी के आगे लोग यह खतरा भी उठाने को तैयार हैं।

प्रभावित हुआ जनजीवन और पर्यटन

इस संपर्क मार्ग के पूरी तरह बाधित होने से क्षेत्र में संकट गहरा गया है:

थमी पर्यटकों की रफ्तार: हर की दून ट्रेकिंग रूट पर होने के कारण देश-विदेश से आए कई पर्यटक इस मार्ग पर फंस गए हैं।
राशन और जरूरी सामान की किल्लत: ओसला और गंगाड़ जैसे सुदूर गांवों के लिए यह मुख्य मार्ग था। इसके टूटने से खाने-पीने और दवाइयों जैसी आवश्यक सामग्रियों की आपूर्ति ठप हो गई है।

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जान दांव पर लगाने की मजबूरी: मेडिकल इमरजेंसी या जरूरी कामों के लिए स्थानीय ग्रामीणों के पास इस जानलेवा सफर के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं बचा है।

एक बड़ा सवाल:
यह वीडियो जहां एक तरफ इंसानी जुझारूपन और विपरीत परिस्थितियों में ‘समाधान’ निकालने की क्षमता को दिखाता है, वहीं दूसरी तरफ पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन और बुनियादी ढांचे की लाचारी को भी बयां करता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द वैकल्पिक मार्ग तैयार करने और इस समस्या का स्थाई समाधान निकालने की मांग की है, ताकि किसी बड़ी अनहोनी को टाला जा सके।

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