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​कंधों पर पति, दिल में शिवभक्त: 180 KM की कठिन यात्रा में प्रेम और आस्था की मिसाल बनी पत्नी

​ना हालात डिगे, न हिम्मत टूटी: दिव्यांग पति को कंधों पर बिठाकर हरिद्वार पहुँची पत्नी, पेश की सच्चे समर्पण की मिसाल

 

​प्रेम और विश्वास की अनूठी मिसाल: 180 KM की कांवड़ यात्रा में दिव्यांग पति का सहारा बनी धर्मपत्नी

 

 

​कंधों पर आस्था का भार और जीवनसाथी का साथ: मोदीनगर के दंपति ने पेश की अटूट प्रेम की कहानी

 

​’जब साथ हो सच्चा, तो दूरी क्या 180 KM!’: हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान दिखा प्रेम और भक्ति का अद्भुत संगम
​रिश्तों के टूटने के दौर में उम्मीद की किरण: दिव्यांग पति को कंधे पर बैठाकर जलाभिषेक कराने निकली पत्नी

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कंधों पर पति, दिल में शिवभक्ति: 180 KM की कठिन यात्रा में प्रेम और समर्पण की मिसाल बनी पत्नी
हरिद्वार:आज के दौर में जहाँ अक्सर रिश्तों में दरार और बिखरते परिवारों की खबरें सुर्खियाँ बनती हैं, वहीं मोदीनगर से हरिद्वार पहुँचे एक दंपति ने प्रेम, समर्पण और आस्था की ऐसी मिसाल पेश की है जिसने हर किसी का दिल छू लिया। यहाँ एक धर्मपत्नी अपने दिव्यांग शिवभक्त पति को अपने कंधों पर बैठाकर करीब 180 किलोमीटर की कठिन कांवड़ यात्रा तय कर रही है, ताकि दोनों एक साथ भगवान शिव का जलाभिषेक कर सकें।

 

 

यह यात्रा सिर्फ मंजिल तक पहुँचने का जरिया नहीं है, बल्कि जीवनसाथी के प्रति अटूट समर्पण, विश्वास और सच्चे प्रेम का जीता-जागता सबूत है। सफर के हर एक कदम पर पत्नी अपने पति का सहारा बनकर यह संदेश दे रही है कि सच्चे रिश्ते परिस्थितियों के मोहताज नहीं होते, बल्कि हौसले और उम्र भर साथ निभाने के निस्वार्थ वादे से मजबूत होते हैं।

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कांवड़ मार्ग पर इस अनोखे दंपति को देखने के लिए राहगीर रुक-रुक कर उन्हें नमन कर रहे हैं और उनका हौसला बढ़ा रहे हैं। लोग भगवान भोलेनाथ से इस निस्वार्थ जोड़े की यात्रा सकुशल संपन्न होने की प्रार्थना कर रहे हैं।
यह अनोखा सफर यह साबित करता है कि जब प्रेम, आस्था और अटूट विश्वास एक साथ कदम बढ़ाते हैं, तो 180 किलोमीटर की लंबी और कठिन दूरी भी बेहद छोटी पड़ जाती है।

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