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विश्व प्राकृतिक धरोहर वैली ऑफ फ्लावर्स के ईको सिस्टम में बढ़ा ‘हिमालयन पिका’ का कुनबा

चमोली:
अपनी बेशकीमती दुर्लभ पुष्प जैव विविधता और वनस्पतियों के लिए देश-दुनिया में मशहूर उत्तराखंड के चमोली जनपद स्थित भ्यूंडार घाटी की ‘फूलों की घाटी’ (Valley of Flowers) राष्ट्रीय उद्यान के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में अब दुर्लभ वन्यजीव भी सुरक्षित माहौल में फल-फूल रहे हैं। लगभग 10 वर्ष पूर्व संकटग्रस्त प्रजातियों की श्रेणी में शामिल किया गया खूबसूरत स्तनपायी जीव ‘हिमालयी पिका’ (Himalayan Pika) का कुनबा अब वैली ऑफ फ्लावर्स और श्री हेमकुंड साहिब क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है।

 

 

इन दिनों फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर रंग-बिरंगे फूलों के बीच पथरीली पगडंडियों पर उछलते-कूदते और कुलांचे भरते ‘हिमालयी पिका’ पर्यटकों और श्रद्धालुओं के विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

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हिमालयन पिका: एक नजर में

वैज्ञानिक नाम ओचोटोना हिमालया (Ochotona)
स्थानीय नाम बिना पूंछ वाला चूहा
प्रजाति/परिवार खरगोश (Lagomorpha) परिवार
पारिस्थितिक भूमिका जलवायु परिवर्तन का संकेतक

 

 

 

जलवायु परिवर्तन का प्रमुख संकेतक
स्थानीय बोली में ‘बिना पूंछ वाला चूहा’ कहे जाने वाले हिमालयी पिका का वैज्ञानिक नाम ओचोटोना हिमालया है, जो वास्तव में खरगोश परिवार का एक महत्वपूर्ण सदस्य है। पहाड़ी ढलानों पर रहने वाले इस छोटे जीव को पर्यावरणविद ‘जलवायु परिवर्तन का संकेतक’ मानते हैं।
हिमालयी क्षेत्र की जैव विविधता को संतुलित बनाए रखने में इनकी अहम भूमिका है। ये मुख्य रूप से घास और पत्तियों को अपने भोजन के रूप में इस्तेमाल करते हैं, जिससे प्राकृतिक रूप से वनस्पतियों की छंटाई होती रहती है और नए पौधों को पनपने का मौका मिलता है।

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संकट से उबरने की ओर बढ़ते कदम
वर्ष 2016 में हिमालयी पिका को ‘चिंताग्रस्त श्रेणी’ (Threatened Category) में शामिल किया गया था। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते प्लास्टिक कचरे, मानवीय हस्तक्षेप और ग्लोबल वार्मिंग के कारण इनके प्राकृतिक आवास लगातार सिकुड़ रहे थे, जिससे इनके अस्तित्व पर गहरा संकट मंडराने लगा था। पर्यावरण प्रेमियों में खुशी की लहर: विश्व धरोहर फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब क्षेत्र के संरक्षित वातावरण में हिमालयन पिका की बढ़ती संख्या को पर्यावरण प्रेमी और वैज्ञानिक एक बेहद शुभ संकेत मान रहे हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि घाटी का नाजुक ईको सिस्टम धीरे-धीरे पुनर्जीवित हो रहा है।

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