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“दुर्घटनाओं एवं मृत्यु दर में कमी लाने के उपाय” विषय पर आज सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक की सह-अध्यक्षता की। बैठक में माननीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी जी, श्री हर्ष मल्होत्रा जी तथा संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर सड़क दुर्घटनाओं को एक गंभीर सार्वजनिक, सामाजिक और आर्थिक चुनौती के रूप में रखते हुए व्यापक चर्चा की गई। यह तथ्य सामने रखा गया कि सड़क दुर्घटनाओं के कारण देश को लगभग GDP के 3.14% के बराबर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, जबकि वाहनों की संख्या में तेज़ वृद्धि और सड़क नेटवर्क के सीमित विस्तार से जोखिम और बढ़ा है।

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बैठक के दौरान सरकार द्वारा अपनाई गई समग्र 4E रणनीति—इंजीनियरिंग, प्रवर्तन, शिक्षा और आपातकालीन देखभाल—की प्रगति की समीक्षा की गई। राष्ट्रीय राजमार्गों पर बड़े पैमाने पर रोड सेफ्टी ऑडिट, दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट्स के सुधार, मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के प्रभावी प्रवर्तन, सुरक्षित वाहन मानकों, तकनीक आधारित निगरानी एवं प्रवर्तन व्यवस्था तथा दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस उपचार और सुदृढ़ ट्रॉमा केयर नेटवर्क जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।

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बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि सड़क सुरक्षा एक सतत और बहुआयामी प्रयास है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ उद्योग, नागरिक समाज और प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। सरकार का उद्देश्य वर्ष 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं और मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाना है, ताकि एक सुरक्षित, उत्तरदायी और मानवीय सड़क परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।

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