अल्मोड़ा मोहान वन क्षेत्र में बाघ को ट्रैनक्यूलाइज़ करने की कोशिशें तेज, कॉर्बेट विशेषज्ञ टीम के साथ 2 ड्रोन और 33 कैमरा ट्रैप तैनात

0
ख़बर शेयर करें -

 

अल्मोड़ा मोहान वन क्षेत्र में बाघ को ट्रैनक्यूलाइज़ करने की कोशिशें तेज, कॉर्बेट विशेषज्ञ टीम के साथ 2 ड्रोन और 33 कैमरा ट्रैप तैनात

 

 

 

 

अल्मोड़ा/मोहान, 12 अगस्त: मोहान वन क्षेत्र के डबरा सौराल, तड़म और काठ की नाव क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने और बाघ को सुरक्षित रेस्क्यू करने के लिए वन विभाग ने पूरी ताकत झोंक दी है। उप प्रभागीय वनाधिकारी रानीखेत के नेतृत्व में कई रेंजों की टीमें क्षेत्र में लगातार कैंप कर गश्त व निगरानी में जुटी हैं।

 

 

 

 

एसडीओ (वन विभाग) काकुल पुंडीर ने बताया कि क्षेत्र में वन्यजीवों की गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है। ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग की टीम स्कूली बच्चों को अपनी निगरानी में सुरक्षित स्कूल पहुंचा रही है। साथ ही, आवाजाही के रास्तों पर झाड़ियों का कटान कराया जा रहा है ताकि दृश्यता साफ रहे और दुर्घटना का खतरा कम हो।

यह भी पढ़ें 👉  अल्मोड़ा सोमेश्वरर सड़क के गड्ढों को बताया 'स्विमिंग पूल', कांग्रेस ने कैबिनेट मंत्री से व्यंग्यात्मक अंदाज़ में मांगी "क्षमा"

 

 

 

तकनीक और सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग

बाघ को सुरक्षित पकड़ने के लिए क्षेत्र में अत्याधुनिक संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है:

ड्रोन और कैमरे: 2 ड्रोन कैमरों से हवाई निगरानी की जा रही है, जबकि 33 कैमरा ट्रैप और 2 लाइव कैमरे बाघ की मूवमेंट को ट्रैक कर रहे हैं।

पिंजरे: बाघ की संभावित आवाजाही वाले स्थानों पर 07 पिंजरे लगाए गए हैं।

सुरक्षा उपकरण: गश्ती टीम 06 एनाइडर, 07 फॉक्स लाइट, राइफल और गांधी बंदूक के साथ क्षेत्र में मुस्तैद है।

यह भी पढ़ें 👉  अल्मोड़ा का ऐतिहासिक बद्रेश्वर मंदिर: स्थापत्य, परंपरा और धार्मिक चेतना

 

 

 

 

 

कॉर्बेट की विशेषज्ञ टीम और विभिन्न प्रभागों का सहयोग

बाघ को रेस्क्यू करने के लिए कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की विशेषज्ञ टीम और डॉक्टरों की टीम लगातार प्रयासरत है। इसके अलावा रामनगर वन प्रभाग, कालागढ़ टाइगर रिजर्व और अल्मोड़ा वन प्रभाग की रानीखेत, जौरासी, द्वाराहाट एवं अल्मोड़ा रेंज की टीमें संयुक्त रूप से कैंप कर गश्त कर रही हैं।

 

 

 

जन-जागरूकता अभियान जारी

क्षेत्रीय वन अधिकारी मोहान के नेतृत्व में वन कर्मियों द्वारा ग्रामीणों से संवाद स्थापित कर सुरक्षा बरतने की अपील की जा रही है। गांवों में पोस्टर लगाने के साथ-साथ लाउडस्पीकर द्वारा घोषणाएं और जागरूकता गोष्ठियां आयोजित की जा रही हैं, ताकि लोग शाम और सुबह के समय सतर्क रहें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *