Almora News:हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं होने से मरीज परेशान, प्लास्टर के लिए लगानी पड़ रही है काशीपुर, हल्द्वानी की दौड़

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पहाड़ो में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहाल हैं। क्योंकि यहां जरूरत के हिसाब से डॉक्टर नहीं हैं। जिससे लोगों को सही इलाज नहीं मिल पा रहा है।प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं पर्वतीय क्षेत्रों में पटरी से उतरी हुई हैं। इसका सबसे बड़ा कारण स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों की कमी होना है।

🔹नगरी अस्पतालो में दौड़ लगाने को मजबूर 

सल्ट विकासखंड के सीएचसी देवायल में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली है। यहां हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं होने से मरीज परेशान हो रहे हैं। अस्पताल में एक्सरे तो हो रहा है लेकिन प्लास्टर लगाने के लिए ढाई से तीन हजार रुपये खर्च कर काशीपुर या हल्द्वानी की दौड़ लगानी पड़ रही है।

🔹हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं

जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के दावे फेल साबित हो रहे हैं। हड्डी रोग के उपचार के लिए अन्य जिलों की दौड़ सल्ट विकासखंड के लोगों को लगानी पड़ रही है। विकासखंड के 60 हजार लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए खोले गए सीएचसी देवायल में हड्डी रोग विशेषज्ञ का पद स्वीकृत है लेकिन यहां इनकी तैनाती नहीं हो सकी है।

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🔹निशुल्क प्लास्टर के लिए करने पड़ रहे खर्च 

हर रोज हड्डी के 15 से अधिक मरीज पहुंचते हैं। उनके एक्सरे तो यहां हो रहे हैं लेकिन रिपोर्ट जांचने वाला कोई नहीं है। मरीजों को ढाई से तीन हजार रुपये में वाहन बुक कर 80 से 90 किमी दूर हल्द्वानी या काशीपुर की दौड़ लगानी पड़ रही है। निशुल्क प्लास्टर के लिए भी उन्हें हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। 

 

🔹तकनीशियन जांच रहे हैं रिपोर्ट

सीएचसी देवायल में एक्सरे करने के लिए तकनीशियन तैनात हैं। डॉक्टर न होने से वह रिपोर्ट जांच रहे हैं। ऐसे में कई बार मरीजों को गंभीर बताया जा रहा है और हल्द्वानी, काशीपुर की दौड़ लगाकर वह मामूली रोग से ग्रसित मिल रहे हैं। एक महिला ने बताया कि गिरने से उनके एक हाथ में चोट आ गई थी और वह सीएचसी पहुंचीं। यहां एक्सरे में हड्डी में फ्रैक्चर बताया गया। जब वह प्लास्टर के लिए काशीपुर पहुंची तो वहां केवल मांस फटने की बात कही गई और मामूली दवा देकर घर भेज दिया गया। कहा कि यदि यहां हड्डी रोग विशेषज्ञ होते तो उन्हें काशीपुर की दौड़ नहीं लगानी पड़ती। 

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हड्डी रोग विशेषज्ञ न होने से मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है। तकनीशियन के रिपोर्ट पढ़ने में गलती हो सकती है। यहां प्लास्टर की भी सुविधा नहीं है-डॉ. धीरेंद्र मोहन गहलोत, प्रभारी चिकित्साधिकारी, सीएचसी देवायल।

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