भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम: माँ धारी देवी के चरण स्पर्श करने पहुँचीं पावन अलकनंदा
भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम: माँ धारी देवी के चरण स्पर्श करने पहुँचीं पावन अलकनंदा
विशेष संवाददाता
श्रीनगर गढ़वाल:
उत्तराखंड की रक्षक और चारधाम की रक्षक मानी जाने वाली सिद्धपीठ माँ धारी देवी के दरबार में एक बार फिर भक्ति, आस्था और प्रकृति का ऐसा अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जिसे देखकर हर श्रद्धालु नतमस्तक हो गया। पर्वतीय क्षेत्रों में हो रही वर्षा के कारण उफान पर आई पावन अलकनंदा नदी की लहरें माँ धारी देवी के मंदिर के चबूतरे तक पहुँच गईं, जिसे स्थानीय श्रद्धालुओं और पुजारियों ने “अलकनंदा द्वारा माँ धारी देवी के चरण पखारने” (चरण स्पर्श) की अलौकिक घटना के रूप में देखा।
गढ़वाल क्षेत्र में श्रीनगर और रुद्रप्रयाग के बीच कलियासौड़ में अलकनंदा नदी के मध्य स्थापित यह ऐतिहासिक सिद्धपीठ न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से बल्कि पौराणिक मान्यताओं के लिए भी जाना जाता है।
श्रद्धालुओं में उमड़ा उत्साह, लगा जयकारों का ताँता
जैसे ही अलकनंदा का जलस्तर मंदिर के निचले हिस्से को छूने लगा, मंदिर परिसर “जय माँ धारी” और “जय गंगे” के जयकारों से गूँज उठा। इस नज़ारे को अपने कैमरे में कैद करने और माँ के दिव्य रूप का दर्शन करने के लिए दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि उफनती नदी की गर्जना के बीच यह दृश्य डरावना नहीं, बल्कि अत्यंत शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर महसूस हो रहा था।
पौराणिक मान्यता और आस्था
स्थानीय लोक कथाओं और बुजुर्गों की मान्यता है कि अलकनंदा माँ धारी देवी की परम भक्त है और जब-जब नदी का जल स्तर माँ के मंदिर के समीप पहुँचता है, तो माना जाता है कि अलकनंदा माँ के चरणों में अपनी भक्ति अर्पित करने आई है। माँ धारी देवी को गढ़वाल क्षेत्र की रक्षक माना जाता है और यह भी मान्यता है कि माँ दिन में तीन बार अपना रूप (कन्या, युवती और वृद्धा) बदलती हैं।
प्रशासन और पुलिस सतर्क
एक तरफ जहाँ श्रद्धालुओं के लिए यह आस्था का विषय रहा, वहीं दूसरी ओर अलकनंदा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया।
जल पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। मंदिर समिति ने भी अलर्ट जारी करते हुए श्रद्धालुओं को नदी के तट से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार:
“जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तटीय इलाकों में सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं।”
श्रद्धालुओं के लिए यादगार पल
मौसम की परवाह किए बिना माँ धारी देवी के दर्शनों के लिए आए यात्रियों का कहना था कि अलकनंदा की लहरों को माँ के चरणों से टकराते देखना उनके जीवन का एक अविस्मरणीय क्षण बन गया है। संध्या आरती के समय अलकनंदा की कल-कल बहती धारा और जल की छपाक से ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरी प्रकृति माँ की आरती उतार रही हो।