जब चलती ट्रेन के AC कोच में यात्री ने जलाई धूप-अगरबत्ती और दीपक, सह-यात्री की समझदारी से टला बड़ा हादसा
जब चलती ट्रेन के AC कोच में यात्री ने जलाई धूप-अगरबत्ती और दीपक, सह-यात्री की समझदारी से टला बड़ा हादसा
नई दिल्ली
चलती ट्रेन के एसी (AC) कोच में एक यात्री द्वारा पूजा-पाठ के दौरान खुली आग और अगरबत्ती जलाने का मामला सामने आया है। यात्री ने ट्रेन के डिब्बे में ऊपर वाली बर्थ (Upper Berth) पर बैठकर बाकायदा अगरबत्ती और दीपक जला लिया। गनीमत यह रही कि पास में ही बैठे एक अन्य सतर्क यात्री ने समय रहते उसे रोक दिया, जिससे डिब्बे में फायर अलार्म बजने या कोई बड़ा हादसा होने से बच गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रेन अपने गंतव्य की ओर जा रही थी, तभी एसी कोच की ऊपर वाली सीट पर बैठे एक यात्री ने अपनी दैनिक पूजा शुरू की। पूजा के दौरान उसने अगरबत्ती के साथ-साथ एक छोटा दीपक (खुली आग) भी प्रज्वलित कर दिया।
एसी कोच पूरी तरह से बंद और वातानुकूलित (Air Conditioned) होते हैं। डिब्बे के भीतर अचानक धुआं उठता देख और जलता हुआ दीपक देखकर पास वाली सीट पर बैठे एक सह-यात्री का ध्यान उस ओर गया।
सह-यात्री ने प्यार से समझाया खतरा
खतरे की गंभीरता को समझते हुए पास बैठे यात्री ने बिना कोई हंगामा किए बहुत ही शांति और प्यार से पूजा कर रहे व्यक्ति को समझाया। उसने बताया कि
एसी डिब्बों में बेहद संवेदनशील ‘स्मोक डिटेक्टर्स’ (Smoke Detectors) लगे होते हैं। अगरबत्ती के धुएं से तुरंत ऑटोमैटिक फायर अलार्म बज सकता है, जिससे ट्रेन में अफ़रातफ़री मच सकती है और इमरजेंसी ब्रेक लग सकते हैं।
चलती ट्रेन में कपड़ा, फोम की सीटें और वातानुकूलन के कारण आग बहुत तेजी से फैलती है। ऐसे में जलता हुआ दीपक या अगरबत्ती की चिंगारी गिरना किसी भीषण हादसे को न्योता दे सकता है।
सह-यात्री की बात सुनकर और स्थिति की संवेदनशीलता को समझते हुए पूजा कर रहे व्यक्ति ने तुरंत अगरबत्ती और दीपक को बुझा दिया।
रेलवे प्रशासन लगातार यात्रियों को जागरूक करता है कि ट्रेन परिसर में किसी भी प्रकार का ज्वलनशील पदार्थ ले जाना, बीड़ी-सिगरेट पीना या खुली आग (दीपक/अगरबत्ती) जलाना पूरी तरह से प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध है। आस्था का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा सबसे ऊपर है।