Uttrakhand News:कर्णप्रयाग विवाद: तलवार से जानलेवा हमले के आरोपी चारों निहंगों को कोर्ट से मिली जमानत

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कर्णप्रयाग स्लग: हेमकुंड यात्रा मार्ग पर हुए विवाद में गिरफ्तार लोगों को न्यायालय से मिली जमानत। एंकर : हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान कर्णप्रयाग क्षेत्र में स्थानीय लोगों और कुछ श्रद्धालुओं के बीच वाहन पार्किंग को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। घटना में दोनों पक्षों के लोगों को चोटें आईं, जिसके बाद क्षेत्र में कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचे तथा हालात पर नियंत्रण पाया। पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई करते हुए संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और आरोपितों को गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया था कि कानून व्यवस्था भंग करने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध समान रूप से कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

घटना के बाद क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने तथा अफवाहों से दूर रहने की अपील की। नगरासू गुरुद्वारा प्रकरण को शांतिपूर्ण तरीके से निपटाया गया। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया कि हेमकुंड साहिब यात्रा और अन्य धार्मिक गतिविधियां प्रभावित न हों।

इसी मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों को शनिवार को न्यायालय से जमानत मिल गई। इसके साथ ही मामले की आगे की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया न्यायालय के समक्ष निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगी।

पुलिस का कहना है कि पूरे प्रकरण की जांच निष्पक्ष रूप से की जा रही है और जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
[27/06, 7:21 pm] Sanjay Srivastastava: चार निहंगों को जमानत सवाल- कानून का पालन या सरकार पर दबाव ? कर्णप्रयाग में तलवार से जानलेवा हमले के आरोपी चार निहंगों को जिला एवं सत्र न्यायालय से जमानत मिल गई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश विंध्याचल सिंह ने 50-50 हजार के दो जमानती पर रिहाई के आदेश दिए। कोर्ट के इस फैसले के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या यह जमानत कानून की सामान्य प्रक्रिया है या फिर सरकार किसी दबाव में आई?
[27/06, 7:22 pm] Sanjay Srivastastava: कर्णप्रयाग में कुछ दिन पहले निहंगों और स्थानीय लोगों के बीच विवाद हिंसक झड़प में बदल गया था। आरोप है कि इस दौरान निहंगों ने तलवार से जानलेवा हमला किया। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव फैल गया और पुलिस ने सतविंदर सिंह, अजय सिंह, जसप्रीत सिंह और मनप्रीत सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

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कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद जमानत दे दी। कानूनी जानकारों का कहना है कि जमानत मिलना आरोपी का अधिकार है। भारतीय कानून में जब तक दोष साबित न हो, तब तक हर आरोपी निर्दोष माना जाता है। गंभीर धाराओं में भी अगर चार्जशीट दाखिल हो चुकी हो और ट्रायल लंबा खिंचने की संभावना हो तो कोर्ट जमानत दे सकती है।

वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोगों का एक वर्ग इस फैसले से नाराज है। लोगों का कहना है कि तलवार जैसे हथियार से खुलेआम हमले के मामले में इतनी जल्दी जमानत मिलना गलत संदेश देता है।

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हाल ही में श्रीनगर, नगरासू और देहरादून में बाहरी लोगों से जुड़ी घटनाओं के बाद पहाड़ में गुस्सा पहले से है। ऐसे में लोगों को लग रहा है कि सरकार वोट बैंक या किसी दबाव के चलते सख्ती नहीं दिखा पा रही।

सरकार और प्रशासन का कहना है कि कोर्ट का फैसला स्वतंत्र है। जमानत देना या न देना पूरी तरह न्यायालय का अधिकार क्षेत्र है। सरकार इसमें दखल नहीं दे सकती। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता प्रकाश भंडारी ने पैरवी की थी। यानी सरकार ने अपना पक्ष रखा, लेकिन कोर्ट ने जमानत देना उचित समझा।

निहंगों से जुड़े मामलों में पहले भी पंजाब और दूसरे राज्यों में धार्मिक भावनाओं का हवाला देकर तनाव की स्थिति बन चुकी है। ऐसे में सरकारें अक्सर फूंक-फूंक कर कदम रखती हैं। मगर इसे सीधे तौर पर सरकार का डर कहना सही नहीं होगा।

चारों आरोपियों की रिहाई जमानती औपचारिकता पूरी होने के बाद होगी, लेकिन केस खत्म नहीं हुआ है। ट्रायल चलेगा और आरोप साबित होने पर सजा भी हो सकती है। जमानत का मतलब बरी होना नहीं होता।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर कानून, जनभावना और सरकार की भूमिका पर बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में ट्रायल किस दिशा में जाता है और सरकार पहाड़ में कानून व्यवस्था को लेकर कितनी सख्ती दिखाती है।

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