अल्मोड़ा में 53वां कृषि विज्ञान मेला आयोजित, मटर की नई किस्म ‘वीएल श्रेष्ठ’ का लोकार्पण

अल्मोड़ा में 53वां कृषि विज्ञान मेला आयोजित, मटर की नई किस्म ‘वीएल श्रेष्ठ’ का लोकार्पण
अल्मोड़ा (विशेष संवाददाता):
हवालबाग स्थित विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस) के परिसर में 53वें कृषि विज्ञान मेले का धूमधाम से आयोजन किया गया। इस मेले में उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से आए बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसानों और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि ‘कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल, नई दिल्ली’ के अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार तथा संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया।
उद्घाटन के पश्चात मुख्य अतिथि डॉ. संजय कुमार ने किसानों, वैज्ञानिकों और स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए विभिन्न कृषि स्टालों का अवलोकन किया। उन्होंने स्टालों पर प्रदर्शित स्थानीय जैविक उत्पादों, उन्नत बीजों और नवीन कृषि उपकरणों के बारे में जानकारी ली। डॉ. कुमार ने पर्वतीय क्षेत्र की विषम परिस्थितियों में किसानों की आजीविका सुधारने और कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए संस्थान द्वारा किए जा रहे शोध कार्यों की सराहना की।
इस अवसर पर संस्थान द्वारा विकसित सब्जी मटर की नई उन्नत किस्म ‘वीएल श्रेष्ठ’ तथा अन्य फसलों की तकनीकों का विधिवत लोकार्पण किया गया। वैज्ञानिकों के अनुसार यह नई किस्म पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों के लिए पैदावार और गुणवत्ता के लिहाज से अत्यंत लाभदायक सिद्ध होगी।
मेले के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को पर्वतीय खेती में वैज्ञानिक तकनीकों के प्रयोग, कीट प्रबंधन और मृदा स्वास्थ्य सुधारने के संबंध में महत्वपूर्ण परामर्श दिए। इस मौके पर
डॉ. लक्ष्मी कांत (निदेशक, वीपीकेएएस, अल्मोड़ा ने कहा “आज इस किसान मेले में दो नई तकनीकों का जनता के लिए विमोचन किया जा रहा है। इसमें सबसे एक सब्जी मटर की प्रजाति है ‘वीएल श्रेष्ठ’, जो हाल ही में भारत सरकार द्वारा अधिसूचित की गई है। इसकी खासियत यह है कि यह जल्दी पकने वाली किस्म है, यानी इसमें फसल की तुड़ाई जल्दी ले सकते हैं। इसकी उत्पादन क्षमता फलियों की 110 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के हिसाब से है। चूंकि यह जल्दी पक जाती है,
इसलिए मटर में लगने वाली एक बहुत ही महत्वपूर्ण बीमारी ‘चूर्णिल आसिता’ (Powdery Mildew) से इसका बचाव हो जाता है, जिससे किसान का खर्चा बच जाता है। साथ ही ऑफ-सीजन में फलियां मिलने से बाजार में बेहतर मूल्य मिलता है।इसके अलावा हमने एक बैक्टीरिया ‘NARS 9’ आइडेंटिफाई किया है, जिसका मड़वे की फसल में प्रयोग करने पर उपज 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। साथ ही ‘वीएल सब्जी मटर 13’ का बीज उत्पादन के लिए चौथी कंपनी के साथ करार हो रहा है। ‘वीएल पॉली टनल’ का भी करार किया जा रहा है, जिसका प्रयोग किसान अब फसल सुखाने में भी कर रहे हैं।”
डॉ. संजय कुमार (मुख्य अतिथि व अध्यक्ष, कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल, नई दिल्ली) ने कहा “जब मैं वीपीकेएएस के सारे कार्य देख रहा था, तो मुझे दो-तीन चीजें बहुत स्पष्ट समझ में आईं। एक तो यह कि जो भी काम हो रहा है, वह इस क्षेत्र के लिए बेहद प्रासंगिक (Relevant) है। दूसरा, यह शोध केवल लैब तक सीमित न रहकर ‘लैब से लैंड’ तक पहुंच रहा है। संस्थान का मुख्य उद्देश्य यह देखना है कि किसानों की आमदनी कैसे बढ़े। मेले के माध्यम से किसानों को नई जानकारी, उन्नत बीज और नई किस्में उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही कृषि अपशिष्ट (Waste) के उपयोग और अन्य विभागों के समन्वय से किसानों को विविधता (Diversification) लाने तथा सीमित भूमि से अधिक मुनाफा कमाने का अवसर मिल रहा है।”