Almora उत्तराखंड फिल्म बोर्ड के गठन का दिखने लगा असर: अल्मोड़ा में पहले बड़े प्रोडक्शन हाउस ‘इको माउंटेन पिक्चर्स’ का भव्य उद्घाटन

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उत्तराखंड फिल्म बोर्ड के गठन का दिखने लगा असर: अल्मोड़ा में पहले बड़े प्रोडक्शन हाउस ‘इको माउंटेन पिक्चर्स’ का भव्य उद्घाटन

**ग्राम कटारमल (अल्मोड़ा)।** उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य में फिल्म निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए ‘फिल्म बोर्ड’ के गठन के बाद अब इस क्षेत्र में धरातल पर बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। सरकार की इस नीति से प्रेरित होकर अब स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर के फिल्म निर्माता आगे आने लगे हैं। इसी कड़ी में आज जनपद के ग्राम कटारमल में अल्मोड़ा के पहले स्वतंत्र फिल्म निर्माण संस्था (प्रोडक्शन हाउस) **’इको माउंटेन पिक्चर्स’** का भव्य उद्घाटन संपन्न हुआ।

इस ऐतिहासिक अवसर पर क्षेत्र के सम्मानित संत त्रिभुवन गिरि महाराज ने मुख्य अतिथि के रूप में फीता काटकर और दीप प्रज्वलित कर प्रोडक्शन हाउस की औपचारिक शुरुआत की। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में जय मित्र सिंह बिष्ट, मनमोहन चौधरी, ध्रुव कुमार टम्टा, आलोक वर्मा और शेखर लाखचौरा सहित क्षेत्र की कई गणमान्य विभूतियां उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत ‘देवभूमि रंगमंच सांस्कृतिक समिति, अल्मोड़ा’ के कलाकारों द्वारा पारंपरिक ‘शकुनाखर’ और मांगलिक गीतों के साथ की गई।
### ‘नेटफ्लिक्स’ और ‘NFDC’ के मंच पर चमकी उत्तराखंड की फिल्म उद्घाटन समारोह का मुख्य आकर्षण संस्था की पहली हिंदी feature फिल्म **’यारसा गाम्बू’** रही। यह फिल्म हाल ही में गोवा में आयोजित *NFDC-Waves फिल्म बाज़ार वर्क-इन-प्रोग्रेस लैब 2025 (Powered by Netflix)* में पूरे दक्षिण एशिया की शीर्ष 5 फीचर फिल्मों में चुनी गई है। इतना ही नहीं, फिल्म को प्रतिष्ठित **’प्रसाद लैब स्पेशल मेंशन अवार्ड’** से भी नवाजा जा चुका है, जिसने रिलीज से पहले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड का नाम रोशन किया है।

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### ‘सेव हिमालया’ मुहिम के साथ आगे बढ़ेगा सिनेमा
संस्था के संस्थापक और निर्माता **कुंदन सिंह बिष्ट** ने इस अवसर पर कहा: “उत्तराखंड सरकार द्वारा फिल्म बोर्ड बनाए जाने से हम जैसे निर्माताओं को एक नई ऊर्जा और दिशा मिली है। ‘इको माउंटेन पिक्चर्स’ का उद्देश्य केवल फिल्में बनाना नहीं है, बल्कि **’सेव हिमालया’ (Save Himalayas)** मुहिम के तहत यहाँ के संवेदनशील पर्यावरण, संस्कृति और समाज की आवाज़ को वैश्विक पटल पर ले जाना है।”

### क्या है फिल्म ‘यारसा गाम्बू’ की कहानी?
फिल्म के लेखक और निर्देशक **मोहन बेलवाल** ने फिल्म के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह फिल्म हिमालयी जनजातियों के अस्तित्व, प्रतिशोध और मां-बच्चे के अटूट रिश्ते पर आधारित एक बेहद संवेदनशील **’सर्वाइवल ड्रामा’** है। इस अवसर पर एसोसिएट प्रोड्यूसर तुषार सिंह बिष्ट और एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर ने भी आगामी परियोजनाओं के बारे में चर्चा की।

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संस्थापक कुन्दन सिंह बिष्ट, त्रिभुवन महाराज, मनमोहन चौधरी, आलोक वर्मा, सागर मेहता और जयमित्र बिष्ट ने संयुक्त रूप से फीता काटकर इस नए सफर की शुरुआत की।
*यह शुरुआत इस बात का प्रतीक है कि उत्तराखंड में फिल्म नीति और फिल्म बोर्ड का गठन स्थानीय स्तर पर रोजगार, फिल्म पर्यटन (Film Tourism) और कला-संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो रहा है।*

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