क्या बच पाएंगे दिन प्रति दिन बढ़ रहे है वन अग्नि के मामले जिसने बढ़ाई चिंताएं।

उत्तराखंड– उत्तराखंड में इन दिनों एक बड़ी आपदा के संकेत मिलने लगे हैं। दरअसल, यह आपदा वनाग्नि से जुड़ी है। जी हां, राज्य के जंगलों में जिस तरह से आग अपना पैर पसार रही है। उससे आने वाले दिनों में एक बड़ा खतरा पैदा हो गया है। बहरहाल, मौजूदा स्थिति ये है कि बीते 24 घंटे में उत्तराखंड में 26 अलग-अलग क्षेत्रों में जंगलों में आग लगी थी, जिनमें 40.2 हेक्टेयर से ज्यादा जंगल जलकर राख हो गए। तो वही, अभी तक इस सीजन हुए वन अग्नि की घटना में 300 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र प्रभावित हुई है।

क्या बच पाएंगे  दिन प्रति दिन बढ़ रहे है वन अग्नि के मामले जिसने  बढ़ाई चिंताएं।

आपको बता दें कि जंगलों में आग लगने की दो वजह मानी जाती है पहला प्राकृतिक और दूसरा इंसानों द्वारा लगाई गई आग। ज्यादातर घटनाओं के पीछे लोग ही वजह माने जाते हैं, लेकिन वन विभाग ने इतने सालों में ऐसी घटनाओं के लिए कितने मुकदमे किए और कितने लोगों को जेल की हवा खिलाई इसका आंकड़ा देखकर ही समझा जा सकता है कि या तो वन विभाग बेहद लापरवाह है या फिर इन आग की घटनाओं के पीछे दाल में कुछ काला जैसा है।उत्तराखंड में 15 फरवरी से 6 अप्रैल तक कुल 240 वनों में आग लगने की घटनाएं हुई हैं। इसमें आरक्षित वन क्षेत्रों में 188 घटनाएं तो सिविल वन पंचायत क्षेत्रों में 52 घटनाएं हुई है। पिछले डेढ़ महीने में करीब 300.36 हेक्टेयर वन क्षेत्र इस आग से प्रभावित हुआ है। इसमें आरक्षित वन क्षेत्र का 218.16 हेक्टेयर क्षेत्र है जबकि सिविल वर पंचायत 82.2 हेक्टेयर है।  इस तरह प्रदेश को पिछले डेढ़ महीने में इतनी वन संपदा के चलते करीब 11 लाख से ज्यादा का नुकसान हो चुका है।

क्या बच पाएंगे  दिन प्रति दिन बढ़ रहे है वन अग्नि के मामले जिसने  बढ़ाई चिंताएं।
दरअसल, आग लगने की घटनाएं वन पंचायत के जंगलों की बजाय आरक्षित वनों में ज्यादा दिखाई देती है। ऐसे भी एक सवाल यह उठता है कि वन क्षेत्रों में प्लांटेशन को लेकर जो गड़बड़ी के सवाल उठते रहे हैं कहीं इन आग की घटनाओं का उससे कोई सीधा कनेक्शन तो नहीं? वैसे तो यह जांच का विषय है लेकिन पहले आप ये जानिए कि उत्तराखंड में पिछले डेढ़ महीने में आग लगने की घटनाओं को लेकर क्या आंकड़ा रहा। बीते 24 घंटे में उत्तराखंड में 68 अलग-अलग क्षेत्रों में जंगलों में आग लगी थी जिनमें 300 हेक्टेयर से ज्यादा जंगल जलकर राख हो गए। प्रमुख वन संरक्षक का कहना है कि इस मामले में सभी को निर्देश दिए गए हैं कि उचित व्यवस्था की जाए स्थानीय लोगों को साथ लेकर आग कंट्रोल करने के प्रभाव इंतजाम किए जाएं।उत्तराखंड में वन विभाग द्वारा आग बुझाने के लिए हाई टेक्निक का भी प्रयोग किया जा रहा है। प्रमुख वन संरक्षक ने बताया है कि इंडियन रिमोट सेंसिंग डिपार्टमेंट की मदद से एक विशेष ऐप बनाया गया है। जिससे लोग जिस भी जंगल में आग लगी होगी उसकी फोटो भेजेंगे तो उसकी पूरी लोकेशन और स्थिति की जानकारी वन विभाग को मिल जाएगी और तत्काल आग बुझाने के कार्य किए जाएंगे जाएंगे। वही, देहरादून के डीएफओ नीतीश मणि त्रिपाठी ने बताया कि देहरादून मैदानी क्षेत्र है जिसके चलते इस क्षेत्र में अगर कोई वन अग्नि की छुटपुट घटना होती है तो वहां तत्काल प्रभाव से वन विभाग का स्टाफ पहुंचकर आग पर काबू पा लेता है। साथ ही कहा कि 8 रेंज देहरादून डीएफओ में आते हैं, जहां स्टॉप और पर्याप्त इक्विपमेंट की व्यवस्था पहले ही की जा चुकी है। इसके साथ ही वायरलेस के माध्यम से मास्टर कंट्रोल रूम से सभी जुड़े हुए हैं।

 

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