Uttrakhand News:कैची धाम मंदिर के स्थापना दिवस पर 15 जून को विशेष पूजन और भंडारा का होगा आयोजन,5 लाख मालपुओं का बांटा जाएगा प्रसाद

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कैची धाम मंदिर के स्थापना दिवस पर 15 जून को विशेष पूजन और भंडारा आयोजित होगा। इस अवसर पर 5 लाख मालपुओं का प्रसाद बांटा जाएगा। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने यातायात के लिए फुलप्रूफ प्लान तैयार किया है।

🌸शटल सेवा से हल्द्वानी से भीमताल और भवाली मार्ग पर जाम से बचने की कोशिश की जाएगी।

उत्तराखंड के नैनीताल स्थित कैंची धाम मंदिर में 15 जून को स्थापना दिवस पर देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। स्थापना दिवस के पहले कैंची धाम में मेला भी लगता है। मेला शुरू होने से तीन-चार दिन पहले से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो जाता है। पिछली बार भी ऐसा ही हुआ था। भीड़ को देखते हुए प्रशासन अभी से यातायात के लिए फुलप्रूफ प्लान बनाने में जुट गया है। इस बार स्थापना दिवस पर 5 लाख मालपुए बनाए जाएंगे। इन मालपुओं का प्रसाद श्रद्धालुओं में बांटा जाएगा। 15 जून को मंदिर के स्थापना दिवस पर विशेष पूजन, भंडारा और कीर्तन जैसे आयोजन होंगे।

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🌸शटल सेवा होगी शुरू

पिछले अनुभवों के आधार पर माना जा रहा है कि भीड़ के चलते हल्द्वानी से भीमताल और भवाली मार्ग पर जाम लग सकता है। ऐसे में तय किया गया है कि जाम से बचने के लिए रोडवेज और केमू बसों को शटल सेवा के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे फायदा यह होगा कि सड़क पर छोटे वाहनों की संख्या सीमित रहेगी। इस संबंध में यातायात व्यवस्था को लेकर आरआईओ कार्यालय में बैठक भी हुई। इस बैठक में रोडवेज के अधिकारी, कैंची धाम प्रबंधन समिति के लोग और टैक्सी यूनियन के लोग भी मौजूद रहे।

🌸नीम करोली बाबा कौन थे?

नीम करोली बाबा 20वीं सदी के एक प्रसिद्ध भारतीय संत और हिंदू गुरु थे। वे अपनी दैवीय शक्तियों के कारण लोकप्रिय हुए। उनका असली नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था और उनका जन्म 1900 के आसपास उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में हुआ था। वे हनुमान जी के बहुत बड़े भक्त थे। मान्यताओं के अनुसार नीम करोली बाबा को कलयुग में हनुमान जी का अवतार कहा जाता है।

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🌸1964 में हुई थी आश्रम की स्थापना

महज 11 साल की उम्र में उनके माता-पिता ने उनकी शादी करा दी। इसके बाद वे साधु बनने के लिए घर छोड़कर चले गए। बाद में अपने पिता के कहने पर वे गृहस्थ जीवन में लौट आए और उनके दो बेटे और एक बेटी हुई। 1958 में उन्होंने फिर से घर छोड़ दिया और संन्यासी का जीवन अपना लिया। नीम करोली बाबा ने 1964 में उत्तराखंड के नैनीताल के पास कैंची धाम आश्रम की स्थापना की थी, जो आज भी उनके भक्तों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। हर साल 15 जून को स्थापना दिवस पर कैंची धाम में मेला लगता है, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु आते हैं। आश्रम में हनुमान जी, भगवान राम, शिव और दुर्गा के मंदिर हैं।

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