#देव भूमि उत्तराखंड में15,225 फीट की ऊंचाई पर आस्था का सैलाब: दुर्लभ ब्रह्मकमल की महक के बीच श्री लोकपाल लक्ष्मण मंदिर में उमड़े श्रद्धालु
#देव भूमि उत्तराखंड में15,225 फीट की ऊंचाई पर आस्था का सैलाब: दुर्लभ ब्रह्मकमल की महक के बीच श्री लोकपाल लक्ष्मण मंदिर में उमड़े श्रद्धालु
भारतवर्ष में खजुराहो, सिरपुर और भरतपुर जैसे कई प्रसिद्ध ‘लक्ष्मण मंदिर’ अपनी अद्भुत शिल्पकला और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाने जाते हैं। लेकिन ऐसा ही एक अलौकिक और पौराणिक मंदिर गढ़वाल हिमालय की गोद में भी बसा है। उत्तराखंड के चमोली जिले की उच्च हिमालई लोकपाल घाटी में स्थित **श्री लोकपाल लक्ष्मण मंदिर** समुद्र तल से लगभग **15,225 फीट की ऊंचाई** पर दंडी पुष्कर्णी सरोवर के तट पर विराजमान है। यह दुनिया में भगवान श्री लक्ष्मण को समर्पित सबसे ऊंचा मंदिर माना जाता है।
प्रसिद्ध सिख तीर्थ हेमकुंड साहिब के ठीक समीप स्थित इस धाम में इन दिनों दुर्लभ राज्य पुष्प ‘ब्रह्मकमल’ की भीनी-भीनी खुशबू बिखरी हुई है, जिसकी एक झलक पाने और दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है।
### **पौराणिक महत्व और मान्यताएं**
* **शेषनाग की तपस्थली:** पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहीं पर शेषनाग जी ने घोर तपस्या की थी।
* **मेघनाद वध और ध्यान:** माना जाता है कि मेघनाद वध के बाद भगवान लक्ष्मण जी ने दिव्य शक्ति प्राप्त करने के लिए इसी स्थान पर ध्यान लगाया था।
* **लोकपाल घाटी के आराध्य:** शेषनाग के अवतार भगवान लक्ष्मण को इस घाटी का कुलदेवता और आराध्य माना जाता है।
### **चार माह की पावन यात्रा**
इस वर्ष 22 मई को विधि-विधान के साथ मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। श्री लोकपाल लक्ष्मण मंदिर समिति (पुलना भ्यूंडार) द्वारा इस धाम की सभी पूजा-व्यवस्थाएं और दैनिक अनुष्ठान संचालित किए जाते हैं। श्रद्धालु आगामी चार महीनों तक इस अलौकिक धाम के दर्शन कर सकेंगे।
*”दंडी पुष्कर्णी तीर्थ की अलौकिक छटा और चारों ओर खिले दुर्लभ हिमालई पुष्प श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर रहे हैं। मौसम खुशनुमा बना हुआ है और दैनिक आधार पर भारी संख्या में भक्त मत्था टेकने पहुँच रहे हैं।”*