उत्तराखंड तपोवन की अलौकिक धारा: जहाँ माँ गंगा के ऊपर बहती है एक और ‘आकाश गंगा’
उत्तराखंड तपोवन की अलौकिक धारा: जहाँ माँ गंगा के ऊपर बहती है एक और ‘आकाश गंगा’
उत्तरकाशी:
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित पवित्र गंगोत्री क्षेत्र अपनी अद्भुत सुंदरता और आध्यात्मिक रहस्यों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। माँ गंगा के उद्गम स्थल गोमुख के पास एक ऐसा ही अनोखा और दिव्य नजारा देखने को मिलता है, जहाँ गंगा जी के ऊपर एक और गंगा प्रवाहित होती है—जिसे ‘आकाश गंगा’ के नाम से जाना जाता है।
शिवलिंग पर्वत की तलहटी से होता है उद्गम
माँ गंगा के उद्गम स्थल (गोमुख) के ठीक पास 6,543 मीटर की ऊँचाई पर भव्य शिवलिंग पर्वत स्थित है। इसी शिवलिंग पर्वत की तलहटी से इस रहस्यमयी ‘आकाश गंगा’ नदी का उद्गम होता है। पर्वत श्रृंखलाओं से निकलकर यह नदी पहले तपोवन के विशाल और शांत मैदानों में बहती है और फिर आगे जाकर गंगोत्री ग्लेशियर (हिमनद) में समाहित हो जाती है।
कार्तिक पूर्णिमा की रात दिखता है अलौकिक स्वरूप
दिन में तपोवन के मैदानों से शांत बहने वाली यह आकाश गंगा जब तेज ढालों से नीचे उतरती है, तो इसका रूप देखने लायक होता है। ट्रेकर्स और श्रद्धालु इसी नदी को पार करके प्रसिद्ध तपोवन क्षेत्र तक पहुँचते हैं।
इस नदी का सबसे अद्भुत और विहंगम रूप कार्तिक पूर्णिमा की रात को देखने को मिलता है। इस पावन रात में साफ आसमान के नीचे आकाश गंगा अपने अति-अद्भुत, अलौकिक और भव्य स्वरूप में झिलमिलाती है। रात के सन्नाटे में पहाड़ों के बीच इसका दृश्य ऐसा प्रतीत होता है मानो साक्षात ब्रह्मांडीय सुंदरता धरती पर उतर आई हो।
शिवलिंग पर्वत और तपोवन का यह क्षेत्र न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए, बल्कि अपनी कठिन चढ़ाई और आध्यात्मिक शांति के लिए भी दुनिया भर के पर्वतारोहियों और साधुओं की पहली पसंद बना हुआ है।