Almora News:खूंट–धामस भूमि माफिया प्रकरण में आरोपी को मंत्री का संरक्षण, जनता में आक्रोश

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अल्मोड़ा / हवालबाग (उत्तराखंड):
खूंट–धामस क्षेत्र में सामने आए बहुचर्चित भूमि माफिया प्रकरण, जिसमें स्थानीय ग्रामीणों, वृद्धजनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट, धमकी और भय का माहौल बनाने के आरोप लगे हैं, को लेकर क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है। इस मामले में एक आरोपित व्यक्ति के विरुद्ध विधिवत मुकदमा दर्ज किया जा चुका है, जिसकी पुष्टि प्रशासनिक स्तर पर भी की गई है।

चिंता का विषय यह है कि उक्त भूमि माफिया प्रकरण का वही आरोपित व्यक्ति हाल ही में आयोजित जनता दरबार में पहुँचा, जहाँ उत्तराखंड सरकार में दर्जा प्राप्त मंत्री श्री शंकर कोरंगा द्वारा उसे कथित रूप से समर्थन और संरक्षण दिया गया। जनता का कहना है कि जिस व्यक्ति पर गंभीर आरोप हैं और जिसके खिलाफ FIR दर्ज है, उसे सार्वजनिक मंच से संरक्षण मिलना कानून के शासन पर सीधा आघात है।

इसी जनता दरबार और उससे जुड़े कार्यक्रमों के दौरान मंत्री द्वारा “घसीट कर ले जाने”, “देख लेने”, “ग्राम प्रधान और ब्लॉक प्रमुख सब ठीक कर देंगे” जैसी भाषा का प्रयोग किया गया, जिससे क्षेत्र में भय और असुरक्षा का वातावरण बना। नागरिकों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि इस प्रकार की बयानबाज़ी भूमि माफिया को मनोबल देने और आवाज़ उठाने वालों को डराने का प्रयास है।

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इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अधिवक्ता विनोद चंद्र तिवारी, नैनीताल उच्च न्यायालय ने कहा—

> “खूंट–धामस भूमि माफिया मामले में जिस व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज है, उसे जनता दरबार में समर्थन देना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे यह संदेश जाता है कि कानून से ऊपर राजनीतिक संरक्षण है। मंत्री द्वारा ‘घसीट कर ले जाने’ जैसी भाषा का प्रयोग संविधान और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पूर्णतः विपरीत है। डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य सहित अनेक निर्णय स्पष्ट करते हैं कि गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई भी विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया और मानव गरिमा के अधीन है। इस प्रकार की बयानबाज़ी संविधान की बुनियादी समझ के अभाव को दर्शाती है।”

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अधिवक्ता तिवारी ने आगे कहा कि किसी अधिवक्ता या सामाजिक कार्यकर्ता को न्यायिक सहायता देने से रोकने या परोक्ष धमकी देने का प्रयास, न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप है और यह अवमानना न्यायालय व आपराधिक कानून के अंतर्गत दंडनीय है।

स्थानीय नागरिकों ने यह भी रेखांकित किया कि जब इस प्रकरण में एसडीएम अल्मोड़ा द्वारा निष्पक्ष रुख अपनाते हुए FIR की पुष्टि और कार्रवाई की गई, उसके बाद राजनीतिक दबाव के संकेत मिलना अत्यंत गंभीर विषय है।

🌸जनता की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—

1. भूमि माफिया प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच।

2. आरोपी को किसी भी प्रकार के राजनीतिक संरक्षण की जांच।

3. धमकीपूर्ण बयान देने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई।

4. अधिवक्ताओं, ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

क्षेत्रवासियों ने स्पष्ट किया है कि यदि शीघ्र न्यायोचित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका सहित सभी संवैधानिक उपाय अपनाने के लिए बाध्य होंगे।

— जारीकर्ता

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