उत्तराखंडअल्मोड़ा खेल मंत्री के क्षेत्र में श्मशान घाट पर खेल खेलने को मजबूर बच्चे: कांग्रेस जिलाध्यक्ष भूपेन्द्र भोज
खेल मंत्री के क्षेत्र में श्मशान घाट पर खेल खेलने को मजबूर बच्चे: कांग्रेस जिलाध्यक्ष भूपेन्द्र भोज
अल्मोड़ा। सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र में स्कूली बच्चों के लिए बुनियादी खेल सुविधाओं और अभ्यास स्थल के अभाव का बेहद गंभीर मामला सामने आया है। इस पर कांग्रेस के अल्मोड़ा जिलाध्यक्ष भूपेन्द्र भोज ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए राज्य सरकार और खेल विभाग पर तीखा हमला बोला है।
भूपेन्द्र भोज ने कहा कि सोमेश्वर के अटल उत्कृष्ट विद्यालय (जीआईसी) के टेबल टेनिस (टीटी) खिलाड़ी बच्चे त्रिवेणी घाट श्मशान स्थल पर, जहाँ शव रखे जाते हैं, अभ्यास करने को मजबूर हैं। उन्होंने इसे अत्यंत दुखद, दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक स्थिति बताया।
उन्होंने कहा कि जिस विधानसभा क्षेत्र से राज्य की खेल मंत्री आती हैं, वहाँ बच्चों को अपनी प्रतिभा निखारने के लिए एक सुरक्षित खेल मैदान तक नसीब नहीं हो रहा है। यह सरकार के खेलों को बढ़ावा देने और युवाओं को नशे से दूर रखने के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि केवल कुकर और साड़ियाँ बांटने से क्षेत्र और युवाओं का भला नहीं होने वाला, खेल मंत्री को अपने विधानसभा क्षेत्र के नौनिहालों के भविष्य और बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने सरकार से मांग की है कि सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र में बच्चों के लिए तत्काल उचित खेल मैदान और आवश्यक खेल उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, ताकि ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का सही अवसर मिल सके।
सोमेश्वर के खेल मंत्री के गृह क्षेत्र की यह तस्वीर व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है!
अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) सोमेश्वर में 8वीं और 9वीं कक्षा में पढ़ने वाले दो होनहार छात्र अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए इन दिनों ऐसे स्थान पर अभ्यास करने को मजबूर हैं, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। रविवार के दिन जब स्कूल बंद रहता है, तो नगर या आसपास टेबल टेनिस की कोई अन्य खेल सुविधा न होने के कारण ये बच्चे त्रिवेणी घाट सोमेश्वर में शव रखने वाले स्थल (शवदाह मंच) पर अपनी टेबल टेनिस की प्रैक्टिस कर रहे हैं।
यह स्थिति तब है जब पिछले 12 सालों से सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व खुद प्रदेश की खेल मंत्री कर रही हैं। जब खेल मंत्री के अपने ही विधानसभा क्षेत्र में खिलाड़ियों के लिए न कोई स्पोर्ट्स हॉल है और न ही बुनियादी अभ्यास व्यवस्था, तो पूरे प्रदेश में खेल विकास के बड़े-बड़े दावों की पोल खुलना स्वाभाविक है।
सोमेश्वर के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। सीमित संसाधनों और प्रशासनिक उपेक्षा के बावजूद ये बच्चे अपने सपनों को जिंदा रखे हुए हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि अपनी मेहनत और लगन से देश-प्रदेश का नाम रोशन करने का जज्बा रखने वाले इन युवाओं को कब तक बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसना पड़ेगा?
सोमेश्वर के खिलाड़ियों को अब झूठे आश्वासनों की नहीं, बल्कि धरातल पर स्पोर्ट्स हॉल, आधुनिक उपकरण और बेहतर प्रशिक्षण सुविधाओं की जरूरत है। अगर इन होनहार बच्चों को सही समय पर सही अवसर और संसाधन मिलें, तो यही खिलाड़ी कल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परचम लहराएंगे।
‘प्रतिभा की कमी नहीं, सुविधाओं की कमी है — अब सिर्फ वादे नहीं, खिलाड़ियों को उनका हक चाहिए!’