# शिवभक्ति की राह: कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का छठा दल सीमांत धारचूला पहुँचा, ‘जय भोले’ के जयकारों से गूंजी घाटी*
# शिवभक्ति की राह: कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का छठा दल सीमांत धारचूला पहुँचा, ‘जय भोले’ के जयकारों से गूंजी घाटी*
**पिथौरागढ़/धारचूला:** देवाधिदेव महादेव के परम धाम कैलाश मानसरोवर की पावन यात्रा पर निकला **छठा दल सकुशल सीमांत नगर धारचूला पहुँच गया है।** पिथौरागढ़ जिले के पड़ावों से होते हुए जैसे ही श्रद्धालुओं का यह जत्था धारचूला पहुँचा, स्थानीय निवासियों और प्रशासन ने पारंपरिक कुमाऊंनी परंपरा के अनुसार उनका भव्य स्वागत किया। पूरे क्षेत्र में “हर-हर महादेव” और “जय भोले” के जयघोष गूँज रहे हैं।
### **अनादि काल की सनातन परंपरा और ऐतिहासिक मार्ग**
कैलाश मानसरोवर की यह यात्रा केवल एक भौगोलिक पड़ाव नहीं, बल्कि सनातन चेतना और आत्म-साक्षात्कार की एक अत्यंत प्राचीन व ऐतिहासिक यात्रा है:
सृष्टि का केंद्र ‘अक्ष’ पौराणिक ग्रंथों और पुराणों के अनुसार कैलाश पर्वत को ब्रह्मांड का केंद्र और भगवान शिव व माता पार्वती का अलौकिक निवास स्थान माना गया है।
ऐतिहासिक रेशम मार्ग का हिस्सा:* धारचूला से होकर गुज़रने वाला यह मार्ग भारत, तिब्बत और नेपाल के सदियों पुराने व्यापारिक और आध्यात्मिक संबंधों का साक्षी रहा है। प्राचीन काल से ही ऋषि-मुनि, साधु-संत इसी दुर्गम मार्ग से तपस्या हेतु कैलाश की ओर रुख करते आए हैं।
मानसरोवर की दिव्यता: मान्यता है कि मानसरोवर झील की उत्पत्ति भगवान ब्रह्मा के ‘मानस’ (मन) से हुई थी। इसके पावन जल में स्नान और दर्शन मात्र से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं।
आगे का पड़ाव और प्रशासनिक तैयारी
धारचूला पहुँचे छठे दल के श्रद्धालुओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है, ताकि उच्च हिमालयी क्षेत्रों की परिस्थितियों के अनुसार वे स्वयं को ढाल सकें (Acclimatization)। यहाँ रात्रि विश्राम और सुरक्षा जांच के बाद यह जत्था अपने अगले पड़ाव *गुंजी* और फिर *लिपुलेख दर्रे* की ओर प्रस्थान करेगा।
श्रद्धालुओं का अनुभव: “दुर्गम रास्तों के बावजूद भोलेनाथ की कृपा और यहाँ के मनोरम प्राकृतिक सौंदर्य ने थकान का नामोनिशान मिटा दिया है। धारचूला पहुँचकर ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो हम शिवलोक के द्वार पर पहुँच गए हैं।”