बदरीनाथ धाम चढ़ावा चोरी विवाद: त्रिवेंद्र के निशाने पर मंदिर समिति, राजनीतिक पारा गरमाया
बदरीनाथ धाम चढ़ावा चोरी विवाद: त्रिवेंद्र के निशाने पर मंदिर समिति, राजनीतिक पारा गरमाया
संवाददाता, देहरादून
अयोध्या स्थित श्री राम मंदिर में दान और चढ़ावे को लेकर उपजा विवाद अभी थमा भी नहीं था कि अब देवभूमि उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में भी चढ़ावा चोरी के आरोपों ने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है। हिंदू संगठन ‘भैरव सेना’ द्वारा मंदिर समिति के एक कर्मचारी पर श्रद्धालुओं के चढ़ावे में हेराफेरी करने का संगीन आरोप लगाने के बाद से राज्य का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्मा गया है।
विपक्ष हमलावर, जांच के घेरे में BKTC
मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने और भैरव सेना द्वारा मुख्य कार्याधिकारी को पत्र सौंपकर सीसीटीवी (CCTV) फुटेज सार्वजनिक करने व एफआईआर (FIR) की मांग के बाद विपक्ष को सरकार को घेरने का बड़ा मुद्दा मिल गया है। कांग्रेस इस पूरे प्रकरण पर बेहद हमलावर है और बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के खिलाफ बड़े स्तर पर उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रही है।
हालांकि, बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने मीडिया के सामने आकर सफाई दी है और आरोपों को गंभीरता से लेते हुए आंतरिक जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी गठित करने की बात कही है। साथ ही संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। लेकिन मंदिर समिति की इस त्वरित कार्रवाई और सफाई के बावजूद विपक्ष का आक्रोश शांत होता नजर नहीं आ रहा है।
पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के बयान से बढ़ीं मुश्किलें
इस पूरे विवाद ने सोमवार को उस समय और नया मोड़ ले लिया, जब भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस मुद्दे पर अपनी ही सरकार की व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री ने बदरीनाथ धाम में चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर बेहद कड़ा और मजबूत रुख अपनाते हुए बयान जारी किया है। उन्होंने सीधे तौर पर मंदिर समिति की कार्यप्रणाली पर निशाना साधते हुए मामले की निष्पक्ष व गहन जांच की बात कही है। त्रिवेंद्र सिंह रावत का यह बयान मंदिर समिति के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी करने वाला माना जा रहा है।
साख और जवाबदेही पर उठे सवाल
इतने बड़े और संवेदनशील धार्मिक स्थल पर सीधे तौर पर चढ़ावे की चोरी के आरोप लगने के बाद अब मंदिर समिति और उसके शीर्ष पदाधिकारी सीधे तौर पर सवालों के घेरे में आ गए हैं। चूंकि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की अगाध आस्था से जुड़ा विषय है, इसलिए जनता और राजनीतिक दल दोनों ही सीधे तौर पर समिति से जवाब मांग रहे हैं।
बड़ा सवाल: जिस तरह अयोध्या में दान के मुद्दे पर देशव्यापी राजनीति देखने को मिल रही है, क्या बदरीनाथ धाम का यह विवाद भी देवभूमि की सीमाओं को लांघकर राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ेगा? फिलहाल सभी की नजरें मंदिर समिति की जांच रिपोर्ट और इस पर होने वाले आगामी सियासी घटनाक्रम पर टिकी हैं।