Almora News:डोटियाल गांव में किसानों को मिला सोयाबीन से टोफू निर्माण और आधुनिक कृषि यंत्रों का व्यावहारिक प्रशिक्षण
अल्मोड़ा जनपद के ताकुला विकासखंड अंतर्गत डोटियाल गांव में किसानों के लिए आय बढ़ाने और आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने की दिशा में एक सराहनीय पहल की गई। भाकृअनुप–विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा द्वारा संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत के मार्गदर्शन में 05 फरवरी 2026 को कृषि यंत्र जानकारी एवं सोयाबीन आधारित मूल्यवर्धित उत्पादों पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना – कटाई उपरांत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी तथा भाकृअनुप–विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा के तत्वावधान में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों की उपयोगिता से परिचित कराना एवं सोयाबीन आधारित उत्पादों के माध्यम से अतिरिक्त आय और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना था।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में डोटियाल गांव के 27 किसानों ने भाग लिया। किसानों को सोयाबीन से टोफू (सोयापनीर), सोया दूध एवं सोया बड़ी बनाने का स्वयं करके सीखने का प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने स्वयं इन उत्पादों को तैयार कर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। साथ ही सोयाबीन से विभिन्न उत्पाद बनाने की विधियों से संबंधित लीफलेट (पर्चे) भी वितरित किए गए, ताकि किसान भविष्य में इन तकनीकों को आसानी से अपनाकर लाभ उठा सकें।
इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों की जानकारी भी दी गई, जिसमें विशेष रूप से मंडुवा (रागी) थ्रेशर एवं धान थ्रेशर पर प्रकाश डाला गया। संस्थान के वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों द्वारा विवेक मंडुवा थ्रेशर और धान थ्रेशर की कार्यप्रणाली, उपयोगिता और लाभों की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि मंडुवा थ्रेशर मड़ाई में समय और श्रम की बचत करता है, कम शक्ति में अधिक कार्य करता है तथा चलाने में सरल है। इसकी क्षमता सामान्य फसल में 40–60 किलोग्राम प्रति घंटा तथा अच्छी किस्म की फसल में 60–80 किलोग्राम प्रति घंटा तक है, जबकि धान थ्रेशर की क्षमता लगभग 80–100 किलोग्राम प्रति घंटा है।
