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स्लग- वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी ग्लेशियर झीलों की निगरानी के लिए नोडल विभाग बनाया 

एंकर- उत्तराखंड शासन ने वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी को राज्य की ग्लेशियर झीलों की निगरानी के लिए नोडल विभाग बनाया है। वाडिया इंस्टीट्यूट अन्य केंद्रीय संस्थानों के साथ मिलकर झीलों का अध्ययन करेगा और सेंसर तथा सायरन लगाने की कार्रवाई करेगा। राज्य में लगभग 1200 ग्लेशियर झीलें हैं, जिनमें से 13 को संवेदनशील और अति संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि वाडिया इंस्टीट्यूट ग्लेशियर झीलों के अध्ययन और निगरानी के लिए नोडल एजेंसी होगी। वाडिया के निदेशक नोडल विभाग के रूप में काम करेंगे और अध्ययन के बाद आगे की रणनीति तैयार करेंगे। वाडिया इंस्टीट्यूट ने इस जिम्मेदारी को स्वीकार कर लिया है और अध्ययन के लिए आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी हैं।वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के निदेशक डॉ. विनीत गहलोत ने बताया कि उनका संस्थान ऑपरेशनल स्तर पर काम करने पर ध्यान दे रहा है, ताकि जल्द से जल्द निगरानी प्रक्रिया शुरू की जा सके। इसके लिए विभिन्न केंद्रीय संस्थानों के साथ बातचीत चल रही है और सभी संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने का प्रयास किया जा रहा है।इस अध्ययन में आईआरएस, आईएमडी, सीडब्ल्यूसी और एनआईएच जैसे केंद्रीय संस्थानों की बराबर की हिस्सेदारी होगी। वाडिया इंस्टीट्यूट इन संस्थानों के साथ मिलकर ग्लेशियर झीलों का अध्ययन करेगा और आगे की रणनति तैयार करेगा। वाडिया इंस्टीट्यूट का मुख्य उद्देश्य ग्लेशियर झीलों की निगरानी करना और संभावित खतरों को कम करना है।

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बाइट- विनोद कुमार सुमन, सचिव आपदा प्रबंधन

बाइट- डॉ. विनीत गहलोत, डायरेक्टर वाडिया इंस्टीट्यूट

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