Almora News:राष्ट्रीय कर्मयोगी जन सेवा कार्यक्रम के अंतर्गत तीन दिवसीय प्रशिक्षण का सफल आयोजन
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली से प्राप्त निर्देशों एवं निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त, भाकृअनुप–विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा के दिशा-निर्देश में संस्थान द्वारा राष्ट्रीय कर्मयोगी जन सेवा कार्यक्रम के अंतर्गत दिनांक 19 से 21 जनवरी 2026 तक तीन दिवसीय व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम संस्थान के प्रशासनिक भवन स्थित श्रीमती गर्ट्यूड इमरसन सेन समिति कक्ष, हवालबाग में आयोजित हुआ, जिसमें संस्थान के वैज्ञानिक, तकनीकी, प्रशासनिक तथा कुशल सहायक वर्ग सहित संस्था्न के दोनों कृषि विज्ञान केंद्रों (चिन्यालीसौड़ एवं काफलीगैर) एवं केंद्रीय शीतोष्ण बागवानी संस्थान, मुक्तेश्वर के कुल 100 कार्मिकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य सरकारी सेवकों में कर्तव्यबोध, सेवा भावना, नैतिक मूल्यों, उत्तरदायित्व तथा राष्ट्र निर्माण की भावना को और अधिक सुदृढ़ करना रहा।
राष्ट्रीय कर्मयोगी कार्यक्रम भारत सरकार की एक दूरदर्शी पहल है, जिसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को केवल पदधारी न मानकर उन्हें एक सजग, संवेदनशील और राष्ट्र के प्रति समर्पित कर्मयोगी के रूप में विकसित करना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि प्रत्येक शासकीय कर्मचारी का दैनिक कार्य केवल औपचारिक दायित्व नहीं, बल्कि जनसेवा और राष्ट्र सेवा का माध्यम है। जब कार्य को सेवा और साधना के भाव से किया जाता है, तब वही कार्य राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव बनता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रथम दिवस का आरम्भ प्रतिभागियों के पंजीकरण एवं स्वागत के साथ हुआ। इसके पश्चात कार्यक्रम का परिचय सत्र आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रीय कर्मयोगी की अवधारणा, उसके उद्देश्यों तथा अपेक्षित परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के चार खण्डों नामत: *राष्ट्रीय कर्मयोगी कौन है, सफलता, संतुष्टि और परिपूर्णता की दृष्टि का विस्तार, कर्मयोगी क्षणों का निर्माण करना एवं राष्ट्र निर्माता के रूप में राष्ट्रीय कर्मयोगी* में विभाजित था।
पहले मॉड्यूल ‘राष्ट्रीय कर्मयोगी कौन है’ के अंतर्गत यह समझाया गया कि एक कर्मयोगी वह व्यक्ति है जो अपने कार्य को ईमानदारी, निष्ठा और पूर्ण समर्पण के साथ करता है तथा व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर सार्वजनिक हित को प्राथमिकता देता है। इस सत्र में प्रतिभागियों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया गया कि वे अपने कार्य व्यवहार और दृष्टिकोण का मूल्यांकन करें। दूसरे मॉड्यूल में ‘सफलता, संतुष्टि और परिपूर्णता की दृष्टि का विस्तार’ विषय पर चर्चा की गई। इस सत्र में यह बताया गया कि वास्तविक सफलता केवल पद, वेतन या पदोन्नति तक सीमित नहीं है, बल्कि कार्य से मिलने वाली आंतरिक संतुष्टि, समाज के लिए उपयोगिता और आत्मिक परिपूर्णता भी सफलता के महत्वपूर्ण आयाम हैं। प्रशिक्षकों ने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि जब व्यक्ति अपने कार्य में उद्देश्य और अर्थ खोज लेता है, तब कार्य का बोझ आनंद में परिवर्तित हो जाता है। प्रतिभागियों ने इस सत्र को अत्यंत प्रेरणादायी बताया। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में ‘कर्मयोगी क्षणों का निर्माण’ विषय पर केंद्रित मॉड्यूल आयोजित किया गया। इसमें यह स्पष्ट किया गया कि छोटे-छोटे कार्यों में भी कर्मयोगी क्षण उत्पन्न किए जा सकते हैं, बशर्ते कार्य के प्रति दृष्टिकोण सकारात्मक और सेवा भाव से युक्त हो। कार्यालयी कार्यप्रणाली, सहकर्मियों के साथ व्यवहार, हितधारकों के प्रति संवेदनशीलता और समयबद्ध कार्य निष्पादन जैसे विषयों पर व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को यह संदेश दिया गया कि हर दिन, हर क्षण एक कर्मयोगी बनने का अवसर है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण मॉड्यूल ‘राष्ट्र निर्माता के रूप में राष्ट्रीय कर्मयोगी’ रहा। इस सत्र में यह रेखांकित किया गया कि सरकारी कर्मचारी देश की प्रशासनिक और विकासात्मक रीढ़ होते हैं। उनकी कार्यशैली, ईमानदारी और प्रतिबद्धता का सीधा प्रभाव आम नागरिक के जीवन पर पड़ता है। इसलिए प्रत्येक कर्मयोगी का दायित्व है कि वह अपने कार्य के माध्यम से राष्ट्र की प्रगति, सामाजिक न्याय और जनकल्याण में योगदान दे। इस सत्र ने प्रतिभागियों में राष्ट्र के प्रति गर्व और उत्तरदायित्व की भावना को और अधिक प्रबल किया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए चरणबद्ध रूप से आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सभी वर्गों के विविध सहभागिता से कार्यक्रम और अधिक समृद्ध तथा बहुआयामी बन गया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को iGOT ऐप के उपयोग के बारे में भी जानकारी दी गई और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से निरंतर सीखने के महत्व पर बल दिया गया। यह स्पष्ट किया गया कि राष्ट्रीय कर्मयोगी कार्यक्रम केवल एक प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सतत सीखने और आत्म-विकास की प्रक्रिया है। प्रतिभागियों की पूर्ण उपस्थिति और सक्रिय सहभागिता ने कार्यक्रम की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. पंकज कुमार मिश्रा, प्रधान वैज्ञानिक एवं नोडल ऑफिसर एच.आर.डी. तथा संचालन मास्टर ट्रेनर श्री राजेश कुमार खुल्बे, प्रधान वैज्ञानिक एवं श्री रविंद्र सिंह नेगी, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी द्वारा किया गया। प्रशिक्षण गतिविधियों के प्रभावी संचालन में श्री सचिन कुमार पांडे एवं श्री देवेंद्र सिंह कार्की का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। सभी प्रशिक्षकों ने सरल भाषा, व्यवहारिक उदाहरणों और सहभागितापूर्ण गतिविधियों के माध्यम से विषयवस्तु को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
समापन सत्र में कार्यक्रम का सार प्रस्तुत किया गया और प्रतिभागियों से अपने अनुभव साझा करने का अनुरोध किया गया। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी, प्रेरणादायी और आत्मपरिवर्तनकारी बताया। उन्होंने यह भी संकल्प लिया कि वे अपने कार्यस्थल पर कर्मयोगी के मूल्यों को आत्मसात करते हुए ईमानदारी, पारदर्शिता और सेवा भाव के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे। राष्ट्रीय कर्मयोगी जन सेवा कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित यह प्रशिक्षण न केवल कर्मचारियों के कौशल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह उन्हें एक संवेदनशील, उत्तरदायी और राष्ट्र के प्रति समर्पित कर्मयोगी के रूप में ढालने की दिशा में भी मील का पत्थर सिद्ध हुआ है।
