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संस्कृत शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्रत्येक जिले में गुरूकुल पद्धति के एक-एक विद्यालय स्थापित किए जाने की योजना है। जबकि प्रदेश के पिछड़े विकासखंडों में आश्रम पद्धति आधारित आवासीय विद्यालयों की भी स्थापना की जाएगी।

🌸जिससे संस्कृत शिक्षा को भी बढ़ावा मिल सकेगा।

शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने बुधवार को वर्ष 2026 में प्रस्तावित नये कार्यों की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 के प्रविधानों के तहत एससीईआरटी की ओर से तैयार राज्य पाठ्यचर्या लागू किया जाएगा। नए पाठ्यचर्या में विद्यालयी शिक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक शिक्षा पर फोकस किया गया है।

इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कुल 240 दिवस का शैक्षणिक सत्र तय किया गया है। जिसमें 200 शिक्षण दिवस पठन-पाठन, 20 दिवस परीक्षा व मूल्यांकन तथा 10-10 दिवस बस्ता रहित व अन्य कार्यक्रमों के लिए नियत किए गए हैं।

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कक्षा 11 से छात्रों को अपने रुचि अनुसार विषय चुनने की स्वतंत्रता भी दी गई है, जिससे वे भविष्य की आवश्यकताओं एवं अपनी अभिरुचियों के अनुसार अध्ययन कर सकेंगे। यह पाठ्यचर्या विद्यालयों की कार्य संस्कृति और प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण बदलाव लाने में सक्षम है।

🌸छह हजार से अधिक रिक्त पदों पर होगी भर्ती
शिक्षा मंत्री ने बताया कि नए वर्ष में प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा में विभिन्न संवर्गों में रिक्त छह हजार से अधिक पदों पर भर्ती की जाएगी। जिसमें प्राथमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत सहायक अध्यापक बेसिक के रिक्त 1670 पदों, सहायक अध्यापक (विशेष शिक्षा) के रिक्त पदों तथा माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्रवक्ता के रिक्त 808 पदों पर भर्ती प्रक्रिया गतिमान है।

सहायक अध्यापक एलटी के एक हजार से अधिक पदों को नए वर्ष में भरा जाएगा। इसके अलावा समग्र शिक्षा के अंतर्गत 324 लेखाकार कम सपोर्टिंग स्टाफ, 161 विशेष शिक्षक, 95 कैरियर काउंसलर तथा विद्या समीक्षा केंद्र के 18 पदों को भरा जाएगा। जबकि शिक्षा विभाग के विभिन्न कार्यालयों एवं विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी कार्मिकों के रिक्त 2364 पदों को आउटसोर्स के माध्यम से भरा जा रहा है।

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🌸जीईआर व पीजीआइ रैंकिंग में होगा सुधार

उन्होंने बताया कि विद्यालयी शिक्षा में पीजीआई (प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक) रैंकिंग सुधार के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी ताकि रैंकिंग के लिए निर्धारित सूचकांकों में आवश्यक सुधार किया जा सके। इसके लिए विभागीय स्तर पर प्रशिक्षण व मूल्यांकन किया जाएगा। प्रदेश में सकल नामांकन अनुपात (ग्रास एनरालमेंट रेसियो-जीईआर) पर भी फोकस किया जाएगा, इसके लिए विद्यालयों में भौतिक व मानव संसाधनों का चरणबद्ध ढ़ंग से विकास किया जाएगा साथ ही बालिका शिक्षा को भी प्रदेश में बढ़ावा दिया जाएगा।

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