कुमाऊं विवि के प्रोफेसर बने एसएसजे विवि के कुलपति।राज्यपाल ने प्रो सतपाल सिंह बिष्ट का किया चयन

ख़बर शेयर करें -

सोबन सिंह जीना विवि के स्थायी कुलपति पद की तैनाती को लेकर चल रही कवायद आखिरकार पूरी हो गई है। राज्यपाल कुलाधिपति ने कुमाऊं विवि के जीव विज्ञान विभाग के प्रोफेसर सतपाल सिंह बिष्ट को एसएसजे विवि के स्थायी कुलपति नियुक्त के आदेश जारी कर दिए हैं।

 

 

 

 

विवि का पहले कुलपति प्रो एनएस भंडारी चाहे एसएसजे ही रहे थे लेकिन इस बार बाजी कुमाऊं विवि ने मार ली है। एसएसजे विवि के कुलपति पद के लिए आवेदन करने वाले प्रोफेसरों को यह मौका नहीं मिल पाया है। इसमें प्रभारी कुलपति प्रो जगत सिंह बिष्ट सहित कई अन्य नामों को लेककर पिछले कुछ समय से चर्चाओं का बाजार गरम रहा।

 

 

 

 

 

प्रो बिष्ट विवि के दूसरे स्थायी कुलपति होंगे। प्रो बिष्ट वर्तमान में कुमाऊं विवि नैनीताल में जीव विज्ञान विभाग के प्रोफेसर एवं हेड हैं। चयन को लेकर चली लंबी कवायद व कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद सफल घोषित होने पर उनको यह पद मिला है। कुलाधिपति राज्यपाल ले जनरल गुरमीत सिंह ने 19 सितंबर मंगलवार को उनकी नियुक्ति के आदेश जारी किए हैं।

 

यह भी पढ़ें 👉  चम्पावत में 9 अगस्त को सजेगा 'सावन उत्सव-2026', 15 उत्कृष्ट महिलाओं को मिलेगा 'नंदा शिखर सम्मान'

 

 

 

 

 

जारी आदेश में उनको कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष की अवधि अथवा अग्रेत्तर आदेश जो भी पहले हो तक के लिए यह पदभार दिया गया है। प्रो बिष्ट एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक हैं। उनका शानदार शैक्षिक करियर रहा है। उनके 100 से अधिक शोध पत्र प्रतिष्ठित राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। कुमाऊं विवि में रूसा कार्यक्रम को नया मुकाम देने में उनकी अहम भूमिका रही है। इसके नोडल अधिकारी के तौर पर उनकी पहल को सराहा गया था। विवि में कई प्रशानिक पदों का दायित्व भी उन्होंने बखूबी निभाया है।

 

यह भी पढ़ें 👉  ज्योतिर्मठ-मलारी मार्ग ठप, NDRF-SDRF और प्रशासन की टीमें मौके के लिए रवाना | अलकनंदा तटवर्ती इलाकों में अलर्ट

 

 

 

इधर एसएसजे विवि के पहले कुलपति प्रो नरेंद्र सिंह भंडारी के नवंबर 2022 को व्यक्तिगत तौर पर इस्तीफा देने के बाद से यह पद खाली चल रहा था। हालांकि विवि के हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो जगत सिंह बिष्ट ने कार्यवाहक कुलपति के तौर पर कार्यभार संभाला। नए कुलपति कुमाऊं से ही हैं उनसे उम्मीद की जा रही है कि अपनी प्रतिभाग के बल पर विवि को प्रगति के पथ पर ले जाने में कामयाब होंगे।

हरीश भंडारी अल्मोड़ा