Uttrakhand News:उत्तराखंड के उच्च शिक्षण संस्थानों में शुरू होंगे AI कोर्स: आईआईटी मद्रास के सहयोग से छात्रों को मिलेगी टेक ट्रेनिंग
उत्तराखंड के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों को अत्याधुनिक व वैश्विक तकनीक से जोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। उच्च शिक्षण संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे।
इसके तहत छात्रों को विभिन्न विषयों में एआई के उपयोग और तकनीकी कौशल का प्रशिक्षण दिया जाएगा। दून विश्वविद्यालय, आईआईटी मद्रास, प्रवर्तक टेक्नोलॉजी फाउंडेशन और स्वयं प्लस के सहयोग से ये पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे।
प्रस्तावित पाठ्यक्रमों में एआई एंड एनएमएल यूजिंग पाइथन, एआई इन फिजिक्स, एआई इन अकाउंटिंग, एआई इन केमिस्ट्री, एआई फार एजुकेटर्स और एआई फार एस्पायरिंग इंजीनियर्स शामिल हैं। इससे विभिन्न संकायों के छात्रों को अपने विषय के साथ एआई तकनीक का व्यावहारिक ज्ञान हासिल करने का अवसर मिलेगा।
🌸एआई का लाभ सरकारी कॉलेजों के लिए बेहद जरूरी
प्रदेश में राजकीय और निजी विवि के साथ-साथ स्ववित्तपोषित अधिकतर संस्थान तकनीकी सुविधा से लैंस हैं। कुछ संस्थानों में एआई पाठ्यक्रम संचालित भी किए जा रहे हैं, लेकिन राज्य के 119 राजकीय महाविद्यालयों में 70 प्रतिशत कालेजों में दूरदराज के पर्वतीय क्षेत्रों के युवा पढ़ाई कर रहे हैं, इनमें आज भी तकनीकी शिक्षा सीमित है। ऐसे में यदि आइआइटी मद्रास के सहयोग से इन कालेजों को एआई से जोड़ा जाता है तो सबसे अधिक लाभ ग्रामीण युवाओं को मिलेगा।
🌸इन संस्थानों को मिलेगा एआई का लाभ
उत्तराखंड में 11 राज्य विश्वविद्यालयों के साथ 119 राजकीय महाविद्यालय, 30 से अधिक निजी विश्वविद्यालय और केंद्रीय विश्वविद्यालय समेत कई राष्ट्रीय स्तर के संस्थान संचालित हैं। इनमें एनआईटी, एम्स, आईआईएम, आईआईटी, डीएसटी, सीएसआईआर और डीआरडीओ के संस्थान भी शामिल हैं। दून विश्वविद्यालय के माध्यम से इन संस्थानों के छात्र स्वयं प्लस और आइआइटी मद्रास के पाठ्यक्रमों का लाभ उठा सकेंगे।
स्वयं प्लस भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की पहल है, जिसे आईआईटी मद्रास देशभर में लागू कर रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाले और रोजगारोन्मुखी सीखने के अवसर उपलब्ध कराना है। एआई आधारित इन पाठ्यक्रमों से छात्रों की तकनीकी दक्षता बढ़ने के साथ उनके रोजगार और करियर के नए अवसर भी विकसित होंगे। -प्रो. सुरेखा डंगवाल, कुलपति, दून विश्वविद्यालय।