Uttrakhand News:लिपुलेख विवाद: नेपाल की आपत्ति पर भारत का कड़ा जवाब, कहा- ‘कृत्रिम विस्तार स्वीकार्य नहीं’

0
ख़बर शेयर करें -

भारत और नेपाल के बीच एक बार फिर सीमा से जुड़ा मुद्दा चर्चा में आ गया है. उत्तराखंड स्थित लिपुलेख दर्रे से होकर होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल की आपत्ति के बाद भारत ने स्पष्ट रूप से अपना रुख सामने रखा है.

भारत ने कहा है कि इस क्षेत्र पर नेपाल का दावा न तो उचित है और न ही ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है.

रविवार को नेपाल सरकार ने भारत और चीन को राजनयिक पत्र भेजकर इस मार्ग के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई. नेपाल का कहना है कि लिपुलेख दर्रा उसके दावे वाले क्षेत्र में आता है, जिस पर भारत ने कड़ा जवाब देते हुए अपने पुराने और स्पष्ट रुख को दोहराया है.

🌸नेपाल ने उठाई आपत्ति, भेजा राजनयिक पत्र

नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर पौडेल छेत्री ने बताया कि उनके देश की चिंताओं को भारत और चीन दोनों तक राजनयिक माध्यमों से पहुंचा दिया गया है. नेपाल ने लिपुलेख दर्रे से होकर गुजरने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा के मार्ग पर अपना दावा जताते हुए आपत्ति दर्ज कराई है.

यह भी पढ़ें 👉  Almora News:डीएम की पहल और प्लस एप्रोच फाउंडेशन के सहयोग से संवरा बदहाल आशियाना, राजपुर में जर्जर मकान का हुआ जीर्णोद्धार

🌸भारत का स्पष्ट जवाब

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत का रुख हमेशा से स्पष्ट और सुसंगत रहा है.

“क्षेत्रीय दावों के संबंध में, भारत लगातार यह कहता रहा है कि ऐसे दावे न तो न्यायसंगत हैं और न ही ऐतिहासिक तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित हैं. क्षेत्रीय दावों का इस प्रकार का एकतरफा कृत्रिम विस्तार अस्वीकार्य है,” जायसवाल ने कहा.

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लिपुलेख दर्रा 1954 से कैलाश मानसरोवर यात्रा का एक पारंपरिक मार्ग रहा है और इस रास्ते का उपयोग कोई नई बात नहीं है.

🌸संवाद के लिए भारत तैयार

रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत नेपाल के साथ सभी द्विपक्षीय मुद्दों पर रचनात्मक बातचीत के लिए तैयार है.

उन्होंने कहा, “भारत द्विपक्षीय संबंधों के सभी मुद्दों पर नेपाल के साथ रचनात्मक बातचीत के लिए खुला है, जिसमें संवाद और कूटनीति के माध्यम से सहमत लंबित सीमा मुद्दों का समाधान करना भी शामिल है.”

यह भी पढ़ें 👉  Uttrakhand News:ऋषिकेश का 40 साल पुराना 'राम झूला' दिसंबर तक बंद, जानिए क्या है वजह

🌸2025 में फिर शुरू हुई थी यात्रा

लिपुलेख दर्रे के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा को 2025 में पांच साल के अंतराल के बाद फिर से शुरू किया गया था. यह फैसला भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लंबे समय तक चले सैन्य गतिरोध के बाद संबंध सामान्य करने के प्रयासों के तहत लिया गया था.

🌸जून से अगस्त तक चलेगी यात्रा

इस वर्ष यह यात्रा जून से अगस्त के बीच आयोजित की जाएगी. इसमें 50 तीर्थयात्रियों के 10 दल उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से होकर जाएंगे, जबकि 50 तीर्थयात्रियों के 10 अन्य दल सिक्किम के नाथू ला दर्रे से यात्रा करेंगे.

🌸नेपाल का दावा: संधि के आधार पर क्षेत्र हमारा

नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने दावा किया कि 1816 की सुगौली संधि के तहत लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्र नेपाल के अभिन्न हिस्से हैं.

उन्होंने भारत से इन क्षेत्रों में सड़क निर्माण, सीमा व्यापार और तीर्थयात्रा जैसी गतिविधियों से परहेज करने का आग्रह भी किया है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *