भारत की 16वीं जनगणना और आजादी के बाद की 8वीं जनगणना जल्द ही शुरू होने जा जा रही है. जनगणना 2027 अब उत्तराखंड के दरवाजे तक पहुंचने वाली है. बुधवार (8 अप्रैल) को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता में सचिव जनगणना दीपक कुमार ने पूरी प्रक्रिया का ब्यौरा दिया और प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक संख्या में स्व-गणना में भाग लेने की अपील की.

10 अप्रैल यानि शुक्रवार से 24 अप्रैल (शुक्रवार) 2026 तक, यानी पूरे 15 दिनों तकउत्तराखंड के नागरिक se.census.gov.in पोर्टल पर जाकर खुद अपना विवरण दर्ज कर सकते हैं. यह सुविधा पहली बार दी जा रही है. इसके बाद 25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक प्रगणक घर-घर पहुंचेंगे.

सचिव दीपक कुमार ने बताया कि स्व-गणना की पूरी प्रक्रिया में केवल 15 से 20 मिनट लगते हैं. इसके लिए परिवार के मुखिया का नाम और एक मोबाइल नंबर दर्ज करना जरूरी है. ध्यान रखने वाली बात यह है कि एक मोबाइल नंबर सिर्फ एक ही परिवार के लिए इस्तेमाल हो सकता है. पंजीकरण के वक्त दर्ज किया गया मुखिया का नाम बाद में बदला नहीं जा सकेगा. इसी तरह भाषा का चुनाव भी सोच-समझकर करें. ओटीपी सत्यापन के बाद भाषा बदलने का कोई विकल्प नहीं रहेगा.

🌸दूसरा चरण फरवरी 2027 में

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10 अप्रैल को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्व-गणना करके इस अभियान की शुरुआत करेंगे. जनसंख्या गणना का दूसरा और मुख्य चरण 9 फरवरी 2027 से 28 फरवरी 2027 के बीच संचालित होगा. हिमाच्छादित क्षेत्रों, जिनमें राज्य के 131 गांव और 3 नगरीय क्षेत्र शामिल हैं, उनके लिए विशेष व्यवस्था की गई है. इन दुर्गम इलाकों में जनगणना का काम 11 सितंबर से 30 सितंबर 2026 के बीच किया जाएगा.

🌸पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना

सचिव दीपक कुमार ने बताया कि जनगणना 2027 कई मायनों में ऐतिहासिक है. यह पहला मौका होगा जब जनगणना की पूरी प्रक्रिया शत-प्रतिशत डिजिटल होगी. प्रगणक और पर्यवेक्षक अपने खुद के मोबाइल फोन से डेटा दर्ज करेंगे और पूरे अभियान की निगरानी जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली (CMMS Portal) के जरिए होगी. गौरतलब है कि भारत में पहली जनगणना 1872 में हुई थी और आजादी के बाद 1951 में पहली जनगणना संपन्न हुई थी. वर्ष 2021 की जनगणना कोरोना महामारी की वजह से नहीं हो सकी थी, जिसके चलते छह साल बाद यह अभियान शुरू हो रहा है.

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🌸अधिकारी तंत्र तैयार, प्रशिक्षण जारी

इस बार जनगणना में जातिगत गणना भी शामिल की जाएगी. राज्य में जिलाधिकारियों और नगर आयुक्तों को प्रमुख जनगणना अधिकारी नियुक्त किया गया है. 23 मास्टर ट्रेनर और 555 फील्ड ट्रेनर अपना प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं और प्रगणकों व पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण अभी जारी है. प्रेस वार्ता में जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक ईवा श्रीवास्तव, नगर आयुक्त देहरादून नमामि बंसल, संयुक्त सचिव एस.एस. नेगी और अपर सचिव सुरेश चंद्र जोशी भी मौजूद रहे.