अल्मोड़ा: ऐतिहासिक नंदा देवी महोत्सव के समापन अवसर पर मां नंदा-सुनंदा के पावन डोले की भव्य शोभायात्रा
अल्मोड़ा: ऐतिहासिक नंदा देवी महोत्सव के समापन अवसर पर मां नंदा-सुनंदा के पावन डोले की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। नंदा देवी मंदिर परिसर से शुरू हुई इस डोला यात्रा के साथ ही प्रसिद्ध नंदा देवी मेले का विधिवत समापन हो गया।
मुख्य झलकियां एवं परंपराएं
- पूजा-अर्चना व पारंपरिक रस्में: डोला उठाने से पूर्व मुख्य मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। परंपरा के अनुसार चंद राजवंश के वंशजों द्वारा मां नंदा-सुनंदा की विशेष पूजा-अर्चना एवं आरती संपन्न की गई।
- शोभायात्रा व छोलिया नृत्य: ढोल-दमाऊं, नगाड़ों की गूंज, छोलिया नर्तकों के प्रदर्शन और ‘जय मां नंदा-सुनंदा’ के जयकारों के साथ डोले को मंदिर परिसर से निकाला गया। नगर के मुख्य बाजारों—लाला बाजार, कारखाना बाजार और मल्ला महल—से होते हुए डोला यात्रा आगे बढ़ी, जहां स्थानीय नागरिकों एवं श्रद्धालुओं ने छतों व रास्तों से अक्षत और पुष्प वर्षा कर मां को भावुक विदाई दी।
- ड्योढ़ी पोखर पर आरती: शोभायात्रा के ड्योढ़ी पोखर पहुंचने पर ऐतिहासिक तल्ला महल क्षेत्र से पुजारियों व श्रद्धालुओं द्वारा मां नंदा-सुनंदा की भव्य महाआरती की गई।
- जल विसर्जन: इसके पश्चात डोले को दुगालखोला स्थित डोबा नौला ले जाया गया, जहां पूरी धार्मिक निष्ठा व वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां नंदा-सुनंदा की कदली (केले के तने से निर्मित) प्रतिमाओं का जलाशयों में विसर्जन किया गया।
यातायात व सुरक्षा व्यवस्था
शोभायात्रा के सुगम संचालन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अल्मोड़ा पुलिस प्रशासन ने नगर क्षेत्र में व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए थे। दोपहर से ही शोभायात्रा मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूर्णतः प्रतिबंधित रखी गई और बाहरी जिलों (हल्द्वानी, बागेश्वर, पिथौरागढ़) की ओर जाने वाले ट्रैफिक को धारानौला व लोअर माल रोड से डायवर्ट किया गया।
डोला विसर्जन के साथ ही समूचे अल्मोड़ा व आसपास के पर्वतीय अंचलों के श्रद्धालु नम आंखों से मां को विदा कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना करते नजर आए।