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अल्मोड़ा जीबी पंत संस्थान की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल, कर्मचारियों ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

 

 

 

अल्मोड़ा। गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान (कोसी-कटारमल) एक बार फिर विवादों में घिर गया है। संस्थान की कार्यप्रणाली और शोध प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए नेशनल मिशन ऑन हिमालयन स्टडीज (NMHS) के परियोजना कर्मचारियों ने भ्रष्टाचार, पक्षपात और कुप्रबंधन के आरोप लगाए हैं।

 

 

 

 

अल्मोड़ा प्रेस क्लब में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान एनएमएचएस पीएमयू में कार्यरत डॉ. पुष्कर सिंह, अरविंद कुमार और गौरव कुमार ने अपना पक्ष रखा। कर्मचारियों ने कहा कि वे पिछले एक दशक से अधिक समय से इस राष्ट्रीय मिशन में ईमानदारी से सेवाएं दे रहे थे। उन्होंने कभी भी अपना वेतन बढ़ाने या स्थायीकरण की मांग नहीं रखी। लेकिन वर्ष 2024 में अनुभवहीन नेतृत्व के चलते मिशन की साख को भारी नुकसान पहुंचा है।

 

 

 

भर्ती प्रक्रिया में धांधली और नियमों की अनदेखी का आरोप पीड़ित कर्मचारियों ने बताया कि हाल ही में एनएमएचएस के पुनर्गठन को लेकर संस्थान की ओर से एक भर्ती विज्ञप्ति जारी की गई थी, जिसमें अव्यावहारिक योग्यताएं तय की गईं। जब कर्मचारियों ने इसका विरोध किया, तो मंत्रालय की संयुक्त सचिव नमिता प्रसाद और संस्थान के निदेशक की मौजूदगी में उन्हें सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। हालांकि, ऑनलाइन साक्षात्कार के दौरान ही कई वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को बिना कोई स्पष्ट कारण बताए नोटिस देकर बाहर कर दिया गया।

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कर्मचारियों का आरोप है कि हाल ही में जारी परिणामों में DoPT (कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग) के नियमों को ताक पर रखकर अयोग्य और गैर-हिमालयी राज्यों के अनुभवहीन अभ्यर्थियों का चयन किया गया।

 

 

 

निदेशक और नोडल अधिकारी पर साधा निशाना पत्रकारों से वार्ता करते हुए कर्मचारियों ने संस्थान के निदेशक डॉ. आई.डी. भट्ट और नोडल अधिकारी एम.एस. लोधी पर जानबूझकर अपने करीबियों को लाभ पहुंचाने और कुचक्र रचने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिस काम को वे बरसों से कम मानदेय में कुशलतापूर्वक कर रहे थे, उसी पद के लिए नए चयनित स्टाफ को चार गुना अधिक वेतन दिया जा रहा है।

 

 

 

‘शोध के नाम पर हो रही जनता के पैसे की बंदरबांट’ कर्मचारियों ने संस्थान के कुछ वैज्ञानिकों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि विज्ञान और शोध के नाम पर बड़ा भ्रष्टाचार किया जा रहा है। कई वैज्ञानिक वर्षों से अपने निर्धारित अनुसंधान क्षेत्रों (फील्ड) में गए बिना ही लाखों रुपये का वेतन ले रहे हैं। इसके अलावा, संस्थान किसी रक्षा या परमाणु कार्यक्रम पर काम नहीं करता, फिर भी कर्मचारियों से ब्रिटिशकालीन ‘ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट’ के तहत बांड भरवाकर पारदर्शिता को दबाने का प्रयास किया जाता है।

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आयोग और अदालत का रुख, निष्पक्ष जांच की मांग कर्मचारियों ने बताया कि इस मामले की शिकायत अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग से की गई है और वे अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि वर्तमान भर्ती विज्ञप्ति को तत्काल निरस्त कर पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए तथा किसी योग्य व्यक्ति को एनएमएचएस का नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए। साथ ही, केंद्रीय जांच एजेंसियों से संस्थान के पिछले 10 वर्षों के शोध आंकड़ों और वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है।

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