उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह: जब राज्यपाल ले. ज. गुरमीत सिंह ने संस्कृत में दिया संबोधन, हर कोई रह गया अचंभित

उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह: जब राज्यपाल ले. ज. गुरमीत सिंह ने संस्कृत में दिया संबोधन, हर कोई रह गया अचंभित
हरिद्वार। उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय का हाल ही में संपन्न हुआ दीक्षांत समारोह एक बेहद खास और यादगार पल का गवाह बना। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण प्रदेश के राज्यपाल ले. ज. गुरमीत सिंह (से.नि.) रहे, जिन्होंने मंच से अपना पूरा संबोधन किसी हिंदी या अंग्रेजी के बजाय धाराप्रवाह संस्कृत भाषा में देकर सभी को सुखद रूप से आश्चर्यचकित कर दिया।
अक्सर देखा जाता है कि संस्कृत के प्रचार-प्रसार और इसके महत्व पर मंचों से बड़ी-बड़ी बातें तो खूब होती हैं, लेकिन जब कोई उच्च पदस्थ व्यक्तित्व स्वयं इस भाषा को इतनी सहजता, स्पष्टता और लय के साथ बोलता है, तो उसका प्रभाव कहीं अधिक गहरा पड़ता है। दीक्षांत समारोह में मौजूद अतिथियों, शोधार्थियों और युवाओं के लिए राज्यपाल का यह वक्तव्य एक अलग और अविस्मरणीय अनुभव रहा।
किताबों से निकलकर जन-जन तक पहुंचे संस्कृत कार्यक्रम के दौरान यह संदेश साफ तौर पर उभरा कि संस्कृत केवल प्राचीन ग्रंथों, पूजा-अनुष्ठानों या कक्षाओं के पाठ्यक्रम तक सीमित रहने वाली भाषा नहीं है। जब शीर्ष नेतृत्व और समाज के प्रभावशाली लोग दैनिक जीवन व सार्वजनिक मंचों पर संस्कृत का सहज प्रयोग करते हैं, तो इससे युवा पीढ़ी के मन से इस भाषा को लेकर झिझक खत्म होती है।
इस तरह के प्रयास संस्कृत को आम जीवन में एक जीवंत और व्यावहारिक भाषा के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं। समारोह में मौजूद छात्रों और प्रबुद्धजनों ने माना कि राज्यपाल का यह प्रयास नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और देवभाषा से जोड़ने के लिए लंबे समय तक प्रेरणा देता रहेगा।