Almora News :12 से ज्यादा गांवो को जोड़ने वाली धौलछीना-दियारी सड़क एक साल से क्षतिग्रस्त, गांवों में नहीं पहुंच पा रही एंबुलेंस और रसोई गैस

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धौलछीना-दियारी कांचुला सड़क इससे जुड़े गांवों के गगांव वालो के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। 12 से अधिक गांवों को जोड़ने वाली एक साल से क्षतिग्रस्त सड़क का अब तक सुधारीकरण नहीं हो सका है।जगह-जगह दीवार तो तीन कलमठ पूरी तरह क्षतिग्रस्त हैं। ऐसे में गांवों तक न तो एंबुलेंस पहुंच पा रही है और ना ही रसोई गैस। हालात यह हैं कि गर्भवती और बीमार को टैक्सी बुक कर खतरे के बीच अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है।

🔹108 एंबुलेंस और रसोई गैस वाहन गांवों तक नहीं पहुंच रहे 

धौलछीना-दियारी सड़क का निर्माण दियारी, कांचुला, मटकूड़ा, बमनगांव, महत गांव ,टांगडी, रूपी कूड़ा, पत्थरखानी, सगवाड़ा सहित 12 से अधिक गांवों के ग्रामीणों को राहत पहुंचाने के लिए किया गया था लेकिन यह सड़क लोगों के लिए मुसीबत बन गई है। तीन कलमठों के साथ जगह-जगह सुरक्षा दीवार क्षतिग्रस्त होने से 12 से अधिक स्थानों पर सड़क संकरी है जिससे बड़े वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप है। बीते एक साल से 108 एंबुलेंस और रसोई गैस वाहन गांवों तक नहीं पहुंच सका है। टैक्सी बुक कर गर्भवती और मरीजों को खतरे के बीच अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। वहीं अधिक भाड़ा अदा कर रसोई गैस सिलिंडर भरवाने के लिए धौलछीना की दौड़ लगानी पड़ रही है। इस वजह से इन गांवों की पांच हजार से अधिक आबादी सरकारी मशीनरी की अनदेखी से परेशान है। इधर विभाग बजट का रोना रोकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है। 

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🔹टूटे कलमठ पाट दिए मिट्टी से

यह सड़क बीते वर्ष आपदा में क्षतिग्रस्त हो गई थी लेकिन अब तक सड़क ठीक नहीं हो सकी है। बावजूद इसके आपदा से राहत पहुंचाने के दावे हो रहे हैं। एक साल से ग्रामीण सड़क सुधारीकरण की मांग कर रहे हैं लेकिन अब तक उनकी नहीं सुनी जा रही है। हालात यह हैं कि टूटे कलमठों को मिट्टी से पाटकर औपचारिकता जरूर निभा दी गई। टूटे कलमठों और क्षतिग्रस्त दीवारों के बीच छोटे वाहनों की आवाजाही भी खतरनाक बनी हुई है।