कृषि विज्ञान केंद्र, काफलीगैर में पशुधन आधारित समेकित खेती पर सात दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न

 

कृषि विज्ञान केंद्र, काफलीगैर में पशुधन आधारित समेकित खेती पर सात दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न

 

 

 

अल्मोड़ा/बागेश्वर: कृषि विज्ञान केंद्र, काफलीगैर (बागेश्वर) द्वारा अनुसूचित जाति उप-योजना के अंतर्गत पर्वतीय क्षेत्रों के कृषकों के लिए आयोजित “पशुधन आधारित समेकित खेती की तकनीकें” विषयक सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। भाकृअनुप–विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत के निर्देशन एवं केंद्र के नोडल अधिकारी डॉ. निर्मल हेडाऊ के मार्गदर्शन में 21 से 29 अक्टूबर, 2026 तक चले इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को कृषि और पशुपालन की उन्नत तकनीकों से जोड़कर उनकी आजीविका और आय में वृद्धि करना था।

 

 

 

 

कार्यक्रम के दौरान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. राज कुमार ने पर्वतीय क्षेत्रों में बागवानी की उन्नत तकनीकों, फलों के कलमी पौधे तैयार करने तथा उत्पादन लागत घटाने के वैज्ञानिक तरीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला। विषय वस्तु विशेषज्ञ (पशु विज्ञान) डॉ. नवल किशोर सिंह ने डेयरी, मुर्गीपालन, बकरीपालन, मत्स्य सह बत्तख पालन और मौसमी चारा उत्पादन की जानकारी देते हुए पशुओं के स्वास्थ्य प्रबंधन और संतुलित आहार के बारे में जागरूक किया।

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बागवानी विशेषज्ञ डॉ. कमल कुमार पांडे ने सब्जी उत्पादन और कीट नियंत्रण के उपायों की जानकारी दी, जबकि कृषि प्रसार विशेषज्ञ डॉ. अमित कुमार ने कृषक उत्पादक संगठनों (FPO) और विपणन पर चर्चा की। इस दौरान कृषकों को उन्नत किस्म के बीज, कृमिनाशक औषधियां और अन्य कृषि सामग्रियां भी वितरित की गईं।

 

 

 

प्रशिक्षण के तहत कृषकों को दो दिवसीय व्यावहारिक भ्रमण कराया गया। इस दौरान ग्राम मुझार चौरा के प्रगतिशील कृषक श्री लाल सिंह कठायत और कनस्यारी (गरुड़) के श्री मनोज सिंह भराड़ा ने कीवी उत्पादन, जैविक बासमती धान, वर्मी कम्पोस्ट और मत्स्यपालन के अपने सफल अनुभव साझा किए। इसके अलावा मत्स्यपालक श्री हरीश पांडे के प्रक्षेत्र का भी अवलोकन कराया गया। ऑनलाइन माध्यम से श्री मनोज सिंह कोरंगा, श्री राजेश सिंह तथा पशुपालन, मत्स्य एवं कृषि विभाग के अधिकारियों (डॉ. के.के. जोशी, श्री मनोज सिंह मियान और श्री धीरज बिष्ट) ने भी विभागीय योजनाओं की जानकारी दी

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प्रशिक्षण के अंतिम चरण में कृषकों को केंद्र के प्रक्षेत्र पर पॉलीहाउस खेती, अजोला इकाई और प्राकृतिक खेती का प्रत्यक्ष प्रदर्शन कराया गया। कार्यक्रम के समापन पर उडेरखानी, भट्टखोला, ओखलीसिरोद, झिरौली, सैंज, बिलौरी और लोब सहित 8 गांवों के कुल 25 प्रतिभागी कृषकों को प्रमाण-पत्र, मिल्क केन, खनिज मिश्रण और बीज वितरित कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में नीरज जोशी, डॉ. राजेश कुमार मीणा सहित केंद्र के समस्त स्टाफ का सक्रिय योगदान रहा।

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