बागेश्वर के विद्यालयों में गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान ने मनाया वन्य जीव सप्ताह
बागेश्वर के विद्यालयों में गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान ने मनाया वन्य जीव सप्ताह
बागेश्वर। जी०बी०पन्त राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान, कोसी-कटारमल (अल्मोड़ा) के जैव विविधता संरक्षण एवं प्रबंधन केन्द्र द्वारा उत्तराखंड के विभिन्न विद्यालयों में 2 से 8 अक्टूबर तक वन्य जीव सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में संस्थान के शोधार्थियों की टीम ने जनपद बागेश्वर स्थित विक्टर मोहन जोशी स्मारक राजकीय इंटर कॉलेज बागेश्वर तथा जवाहर लाल नेहरू इंटर कॉलेज, शामा में विशेष जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया।
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के शोधार्थी डॉ. बसंत सिंह ने वन्य जीव सप्ताह की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसके इतिहास और वन्य जीवों के संरक्षण के महत्व पर अपने विचार साझा किए। तत्पश्चात शोधार्थी डॉ. कुलदीप जोशी ने इस वर्ष के वन्य जीव सप्ताह की थीम “Connecting habitats, thriving wildlife” (आवासों को जोड़ना, समृद्ध वन्यजीव) पर विद्यार्थियों को विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने समझाया कि किस तरह वन्य जीवों के प्राकृतिक आवासों का संरक्षण कर हम अपने आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र को समृद्ध बना सकते हैं। डॉ. जोशी ने बताया कि संस्थान के कार्यकारी निदेशक डॉ. आई. डी. भट्ट के कुशल दिशा-निर्देशन में यह कार्य विभिन्न शोध परियोजनाओं के माध्यम से हिमालयी क्षेत्रों में निरंतर संचालित किया जा रहा है।
सत्र को आगे बढ़ाते हुए डॉ. विभाष ध्यानी ने वन संसाधनों के सतत उपयोग एवं प्रबंधन पर प्रकाश डाला और बताया कि वनों का विवेकपूर्ण उपयोग वन्य जीवों के सुरक्षित भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। वहीं संस्थान की शोधार्थी प्रशस्ति साह एवं कनिष्का रौतेला ने जानकारी दी कि संस्थान संपूर्ण हिमालयी क्षेत्र की जैव विविधता का एक विस्तृत डेटाबेस तैयार कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पाई जाने वाली जैव विविधता से जुड़ी जानकारियां संस्थान की आधिकारिक ईमेल आईडी पर साझा करें, ताकि इसे भविष्य में विकसित किए जाने वाले मोबाइल ऐप से जोड़ा जा सके।
दोनों विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने संस्थान द्वारा चलाए जा रहे इन जागरूकता अभियानों, कार्यान्वयन विज्ञान (Implementation Science) तथा संचार विज्ञान (Communication Science) के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने आग्रह किया कि इस प्रकार के कार्यक्रमों को सुदूरवर्ती सीमांत क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर आयोजित किया जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक लोग जागरूक हो सकें।
कार्यक्रम का समापन भारतीय वन्यजीव बोर्ड द्वारा निर्धारित वन्यजीव संरक्षण एवं संवर्धन प्रतिज्ञा के साथ हुआ, जिसे उपस्थित शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से लिया। इस आयोजन में दोनों विद्यालयों के 250 से अधिक छात्र-छात्राओं तथा शिक्षकगणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।