अषाढ़ी मेला: परंपरा और आस्था से खिलवाड़ न करें बाहरी व अशुद्ध जन, वाराही शक्तिपीठ न्यास की अपील
अषाढ़ी मेला: परंपरा और आस्था से खिलवाड़ न करें बाहरी व अशुद्ध जन, वाराही शक्तिपीठ न्यास की अपील
देवीधुरा। विश्वप्रसिद्ध देवीधुरा के अषाढ़ी मेले और पारंपरिक बग्वाल को लेकर श्री वाराही शक्तिपीठ न्यास ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। न्यास के अध्यक्ष हीरा बल्लभ जोशी ने अपील की है कि केवल अधिकृत, शुद्ध तन-मन वाले स्थानीय जन और चार खाम सात थोक के लोग ही बग्वाल में प्रतिभाग करें। बाहर से आने वाले श्रद्धालु परंपराओं की मर्यादा बनाए रखें और बचकानी हरकतों या उपहास से बचें।
अनुष्ठान और भक्ति का पर्व न्यास अध्यक्ष के अनुसार, मेले के दौरान देवी के डोले को उठाने वाले “डोलिया” और बग्वाल खेलने वाले “द्यौक” (देवता के लोग) का यह कार्य पूजा और यज्ञ में आहुति समान है। इस दौरान द्यौक, डोलिया, पुजारी, डंगरिया, जगरिया, ढोली, छुलैत और हुड़किया आदि सभी निष्काम भाव, सात्विक भोजन, व्रत और शुद्ध दिनचर्या के साथ अनुष्ठान में जुड़ते हैं।
मर्यादा न तोड़ने की चेतावनी न्यास ने स्पष्ट किया है कि बग्वाल के दौरान खोलीखंड मैदान में यक्ष, गंधर्व, योगिनी और डाकिनी जैसी अदृश्य शक्तियां भी उपस्थित रहती हैं। जो लोग इसके अधिकारी नहीं हैं या शुद्ध मन से नहीं आए हैं, वे बग्वाल के समय मैदान से दूर रहें ताकि किसी भी प्रकार के प्रमाद से देवी-देवताओं का कोप न झेलना पड़े।
सांस्कृतिक कार्यक्रम भी रहेंगे भक्तिपरक अषाढ़ी मेला विशुद्ध रूप से भक्ति का उत्सव है। मेले में प्रस्तुत किए जाने वाले लोकगीत—चाँचरी, झोड़ा, भगनौल और छपेली केवल देवी-देवताओं की आराधना पर केंद्रित रहेंगे। न्यास ने सभी श्रद्धालुओं से इस पवित्र परंपरा की पवित्रता और गरिमा बनाए रखने में सहयोग की अपेक्षा की है।