उत्तराखण्ड लोक वाहिनी ने किया आह्वान: नई पीढ़ी तक पहुंचे राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदान की गाथा

उत्तराखण्ड लोक वाहिनी ने किया आह्वान: नई पीढ़ी तक पहुंचे राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदान की गाथा
अल्मोड़ा। उत्तराखण्ड लोक वाहिनी (उलोवा) ने पृथक राज्य आंदोलन के इतिहास, संघर्षों और रामपुर तिराहा (मुजफ्फरनगर) कांड के शहीदों के बलिदान को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग उठाई है। उलोवा ने कहा कि 1994 का जनआंदोलन केवल राजनीतिक मांग नहीं था, बल्कि पहाड़ की विशिष्ट परिस्थितियों, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, पलायन और प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय अधिकारों से जुड़ा जन-आकांक्षाओं का प्रतीक था।
संगठन ने कहा कि 2 अक्टूबर 1994 को मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा में आंदोलनकारियों पर हुई पुलिस बर्बरता राज्य के इतिहास का अत्यंत पीड़ादायक अध्याय है। आंदोलनकारियों के त्याग को महज औपचारिक वर्षगांठों तक सीमित रखने के बजाय राज्य की विकास नीतियों में प्रतिबिंबित किया जाना चाहिए। इसके लिए राज्य आंदोलन के प्रमाणिक दस्तावेजीकरण के साथ विद्यालयों व महाविद्यालयों के पाठ्यक्रम में इसे उचित स्थान दिया जाना आवश्यक है, ताकि युवा पीढ़ी इसके मूल उद्देश्यों को समझ सके।
उलोवा ने चिंता जताई कि राज्य गठन के बाद भी पलायन, गैरसैंण राजधानी, मुजफ्फरनगर कांड के दोषियों को सजा और वनाधिकार जैसे बुनियादी मुद्दे आज भी अधूरे हैं। बैठक में पूरन चंद्र तिवारी, दयाकृष्ण कांडपाल, एडवोकेट जगत रौतेला, अजय मित्र बिष्ट, रेवती बिष्ट, मोहम्मद हारिस, अजय मेहता और जगबहादुर थापा सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।