National News:कारगिल युद्ध के 27 साल: बर्फीली चोटियों पर आज भी गूंजती है गढ़वाल राइफल्स के शौर्य और बलिदान की गाथा
भले ही कारगिल युद्ध हुए 27 वर्षों का समय बीत चुका हो, लेकिन आज भी द्रास, बटालिक और कारगिल की बर्फीली चोटियों में गढ़वाल राइफल्स के अद्वितीय शौर्य और पराक्रम की गाथाएं गूंजती हैं।
आपरेशन विजय में 10वीं, 17वीं और 18वीं बटालियन के साथ गढ़वाल स्काउट्स ने भी अपने युद्ध कौशल का लोहा मनवाया था।
इस युद्ध में दो अधिकारियों समेत एक जेसीओ और 53 जवान बलिदान हुए। युद्ध में बटालियनों ने दुश्मनों के न सिर्फ कई बंकरों को ध्वस्त किया, बल्कि भारी मात्रा में हथियारों को कब्जाने में भी सफलता हासिल की।
अद्वितीय पराक्रम के लिए गढ़वाल राइफल्स को सात वीर चक्र, 16 सेना मेडल समेत कई पदकों से सम्मानित किया गया।
कर्नल वीरेंद्र सिंह डढवाल के नेतृत्व में 10वीं गढ़वाल राइफल्स ने अपने जिम्मे वाले क्षेत्र में दुश्मन को घुसपैठ का कोई अवसर नहीं दिया।
कर्नल सुधाकर सतपथी के नेतृत्व में 17वीं गढ़वाल ने बटालिक सेक्टर में दुश्मन के बंकर ध्वस्त कर कई रणनीतिक ठिकानों पर कब्जा किया। इसी अभियान में कप्तान जिंटू गोगोई ने अद्वितीय वीरता का परिचय देते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया।
कर्नल एसके चक्रवर्ती के नेतृत्व में 18वीं गढ़वाल ने द्रास सेक्टर में प्वाइंट-4700 सहित कई महत्वपूर्ण चौकियों पर विजय प्राप्त कर युद्ध की दिशा बदल दी।
वहीं, गढ़वाल स्काउट्स के जवानों ने काकसर के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र में अपने विशेष पर्वतीय युद्ध कौशल से दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
कारगिल युद्ध में गढ़वाल स्काउट्स के 49 वीर सैनिकों ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया, जबकि 92 सैनिक घायल हुए।
🌸कारगिल युद्ध में गढ़वाल राइफल्स : एक नजर
18वीं गढ़वाल : 19 बलिदान, बैटल आनर द्रास, थियेटर आनर कारगिल।
17वीं गढ़वाल : 21 बलिदान, बैटल आनर बटालिक, थियेटर आनर कारगिल।
10वीं गढ़वाल : 13 बलिदान
वीर चक्र : सात
🌸वीर चक्र विजेता
मेजर राजेश शाह : 18 गढ़वाल
कप्तान जिंटू गोगोई (मरणोपरांत) : 17 गढ़वाल
कप्तान सुमित राय (मरणोपरांत) : 18 गढ़वाल
कप्तान एमवी सूरज : 18 गढ़वाल
नायक कश्मीर सिंह (मरणोपरांत) : 18 गढ़वाल
राइफलमैन कुलदीप सिंह (मरणोपरांत) : 18 गढ़वाल
राइफलमैन अनुसूया प्रसाद (मरणोपरांत) : 18 गढ़वाल
🌸दो बार सेना मेडल
कर्नल एसके चक्रवर्ती : शौर्य चक्र, सेना मेडल
आपरेशन विजय भारतीय सेना के अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प और सर्वोच्च बलिदान का स्वर्णिम अध्याय है। कारगिल की दुर्गम चोटियों पर गढ़वाल राइफल्स के वीर जवानों ने जिस शौर्य और पराक्रम का परिचय दिया, उसने पूरी दुनिया को भारतीय सैनिकों की क्षमता का एहसास कराया। हमें अपने बलिदानियों और वीर सैनिकों की गौरवशाली विरासत पर गर्व है।
– ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी, कमांडेंट, गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंट सेंटर, लैंसडौन