नैनीताल: हाई कोर्ट शिफ्टिंग के फैसले पर भड़के वकील, सरकार और प्रशासन के खिलाफ खोला मोर्चा

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नैनीताल: हाई कोर्ट शिफ्टिंग के फैसले पर भड़के वकील, सरकार और प्रशासन के खिलाफ खोला मोर्चा

 

 

नैनीताल
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नैनीताल से उत्तराखंड उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) को किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट करने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। इस फैसले के विरोध में अब वकीलों ने लामबंद होकर उग्र आंदोलन का रास्ता अख्तियार कर लिया है।

 

 

उत्तराखंड आंदोलनकारी अधिवक्ता मंच के बैनर तले अधिवक्ताओं ने राज्य सरकार और हाई कोर्ट प्रशासन के खिलाफ कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है।

 

 

पहाड़ों से संस्थानों का पलायन चिंताजनक: अधिवक्ता
हाई कोर्ट बार एसोसिएशन सभागार में आयोजित बैठक के दौरान अधिवक्ताओं ने तीखे सवाल खड़े किए। वकीलों का कहना था:

 

पहाड़ के औचित्य पर सवाल:यदि पहाड़ों से सभी बड़े और स्थापित संस्थानों को मैदानी क्षेत्रों में ही शिफ्ट करना है, तो अलग पहाड़ी राज्य की अवधारणा का क्या औचित्य रह जाता है? क्या पहाड़ के लोगों की नियति सिर्फ पलायन ही बनकर रह गई है?

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मूल अवधारणा की उपेक्षा:पृथक उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान मांग थी कि पहाड़ी इलाकों में उद्योग, मेडिकल कॉलेज और शोध संस्थान स्थापित किए जाएं। अफसोस की बात है कि नए संस्थान तो बने नहीं, बल्कि जो पहले से स्थापित हैं, उन्हें भी मैदान में शिफ्ट करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है।

 

अंदरूनी साजिश का आरोप:वकीलों ने आरोप लगाया कि कुछ लोग, जिनमें कुछ अधिवक्ता और हाई कोर्ट प्रशासन के लोग भी शामिल हैं, पहाड़ से हाई कोर्ट को हटाने की साजिश कर रहे हैं। अधिवक्ताओं ने दोटूक कहा कि जिन्हें मैदान जाना है वे जाएं, मैदानी इलाकों में कई अन्य कोर्ट पहले से मौजूद हैं।₹2200 करोड़ का भारी-भरकम बोझ और पर्यावरण को नुकसान
बैठक में अधिवक्ताओं ने वीओ (Voice Over) के माध्यम से मुख्य चिंताओं को रेखांकित किया:

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हाई कोर्ट को शिफ्ट करने में लगभग ₹2,200 करोड़ का भारी-भरकम खर्च अनुमानित है, जिसका सीधा और प्रतिकूल असर राज्य की जनता की जेब पर पड़ेगा।

 

पर्यावरण की बलि: नई जगह हाई कोर्ट बनाने के लिए बड़े पैमाने पर जंगलों को काटना पड़ेगा, जो पर्यावरण के लिहाज से बेहद खतरनाक है।
मुकदमों के निस्तारण पर ध्यान दें: अधिवक्ताओं ने मांग की कि हाई कोर्ट प्रशासन शिफ्टिंग की व्यर्थ बहस में समय गंवाने के बजाय 26 वर्षों से लंबित पड़े पुराने मुकदमों के जल्द से जल्द निस्तारण पर ध्यान केंद्रित करे।

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