Almora News:​सावन के पहले दिन बाबा जागेश्वर के दरबार पहुंचे सीएम धामी, चढ़ाई डेढ़ क्विंटल की घंटी; हरेला पर की ये बड़ी अपील

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जागेश्वर धाम में सीएम धामी की पूजा और हरेला पर्व का संदेश

सावन के पावन महीने की शुरुआत हो चुकी है और इस खास मौके पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अल्मोड़ा के प्रसिद्ध जागेश्वर धाम और वृद्ध जागेश्वर धाम पहुंचे। सीएम धामी ने सावन के पहले दिन भगवान भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए हवन किया।

सावन की शुरुआत के साथ ही आज उत्तराखंड का लोक पर्व हरेला’ भी बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर पर्यावरण संरक्षण का बड़ा संदेश दिया। हालांकि, सावन के पहले ही दिन मुख्यमंत्री के इस धार्मिक दौरे को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज हैं। विपक्ष जहाँ इसे राजनीतिक संदेश के चश्मे से देख रहा है, वहीं भाजपा इसे सनातन परंपरा और संस्कृति से जुड़ाव का प्रतीक बता रही है। 

सावन के पहले दिन के अवसर पर जागेश्वर धाम शिवभक्तों के जयकारों से गूंज उठा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बाबा जागेश्वर के दरबार में शीश नवाया और पूरे विधि-विधान से जलाभिषेक और महामृत्युंजय पाठ किया। सीएम धामी ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि उत्तराखंड निरंतर विकास के पथ पर आगे बढ़ता रहे और सूबे का हर नागरिक सुखी और समृद्ध रहे। इसके साथ ही विरद्ध जागेश्वर में डेढ़ कुंतल की एक विशाल घटी भी चढ़ाई

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लेकिन इस धार्मिक अनुष्ठान के राजनीतिक मायने भी निकाले जाने लगे हैं। जहां भाजपा इसे मुख्यमंत्री का उत्तराखंड की लोक संस्कृति और सनातन परंपरा के प्रति समर्पण बता रही है, वहीं विपक्ष इसे जनता के बीच एक सोचे-समझे राजनीतिक संदेश के तौर पर देख रहा है।

उत्तराखंड के प्राकृतिक जल स्रोत पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री धामी ने प्रदेशवासियों को *हरेला पर्व* की बधाई दी। उन्होंने कहा कि हरेला सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति पूजन का महापर्व है। आज ग्लोबल वार्मिंग के दौर में जब पर्यावरण के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी हैं, तब हरेला जैसे पर्वों की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है। मुख्यमंत्री ने गिरते भूजल स्तर और सूखते जल स्रोतों पर चिंता जताते हुए पर्यावरण बचाने के लिए जन-भागीदारी का आह्वान किया।

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जागेश्वर धाम परिसर आज सावन के पावन महीने की शुरुआत हो रही है और इसके साथ ही उत्तराखंड का पवित्र लोक पर्व ‘हरेला’ भी है। यह पर्व हमें प्रकृति से जोड़ता है। प्रकृति ही हमें जीवन देती है और आज ग्लोबल वार्मिंग के कारण हमारे सामने जो चुनौतियां हैं, उनसे निपटने के लिए हम सबको मिलकर आगे आना होगा। हमारे जो जल स्रोत सूख रहे हैं, पौधारोपण से उन्हें पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी। पर्यावरण को बचाना हम सब का सामूहिक कर्तव्य है। बाबा भोलेनाथ से यही प्रार्थना है कि हमारा उत्तराखंड खुशहाल और समृद्ध रहे।

तो सावन के पहले दिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जहां एक तरफ बाबा भोलेनाथ की शरण में जाकर आध्यात्मिक शांति और विकास की कामना की, वहीं दूसरी तरफ हरेला पर्व के जरिए ग्लोबल वार्मिंग जैसी वैश्विक चुनौती से लड़ने के लिए प्रदेश की जनता को जागरूक भी किया। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री के इस दौरे पर शुरू हुई सियासी बयानबाजी आने वाले दिनों में क्या मोड़ लेती है।

बाइट पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री

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