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पीएम मोदी के दौरे के बाद चमका ‘आदि कैलाश’, 6 साल में 300 से 52 हजार पहुंची यात्रियों की संख्या

  आस्था और रोमांच का नया केंद्र बना ‘आदि कैलाश’, इस साल 1.5 लाख पर्यटकों के पहुँचने की उम्मीद
आदि कैलाश यात्रा ने तोड़े रिकॉर्ड: होमस्टे और बेहतर कनेक्टिविटी से पर्यटन में भारी उछाल

देहरादून  उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में भारत-चीन सीमा के करीब स्थित आदि कैलाश इन दिनों देश-दुनिया के श्रद्धालुओं और साहसिक पर्यटन के शौकीनों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र बन चुका है। भगवान शिव के इस पावन निवास स्थान पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के आंकड़ों ने पिछले कुछ वर्षों में नया रिकॉर्ड कायम किया है।

*6 साल में 300 से 52,000 तक पहुंचा आंकड़ा*
एक समय था जब दुर्गम रास्तों के कारण यहाँ पहुंचना बेहद कठिन था। साल 2015 से 2018 के बीच जब यहाँ के लिए सुगम मार्ग उपलब्ध नहीं था, तब पैदल यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या सालभर में 300 से भी कम हुआ करती थी। साल 2019 में भी यहाँ महज 322 यात्री ही पहुंचे थे। लेकिन बुनियादी ढांचे में सुधार के बाद साल 2025 में यह आंकड़ा 36,000 तक पहुंच गया। वहीं, इस साल (2026) मई महीने से लेकर अब तक 52,000 से अधिक यात्री आदि कैलाश के दर्शन कर चुके हैं। हालांकि, वर्तमान में बरसात के कारण यात्रा की रफ्तार में कुछ कमी जरूर देखने को मिलेगी, लेकिन पर्यटन विभाग को उम्मीद है कि मानसून के बाद इस साल यात्रियों की कुल संख्या 1 लाख से लेकर डेढ़ लाख तक पहुंच सकती है।

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*पीएम मोदी के दौरे और बेहतर व्यवस्थाओं का असर*
उत्तराखंड के पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस क्षेत्र के दौरे के बाद यहाँ व्यवस्थाएं और बुनियादी सुविधाएं बेहद मजबूत हुई हैं, जिसके चलते यात्रियों की संख्या में यह ऐतिहासिक उछाल देखने को मिल रहा है। बुनियादी सुविधाओं के विकास से स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ा है। अब इस पूरे क्षेत्र में यात्रियों के लिए होमस्टे भरपूर मात्रा में उपलब्ध हैं, जहाँ देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को कुमाऊंनी संस्कृति के बीच भोजन और रात्रि विश्राम की शानदार सुविधाएं मिल रही हैं।

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*एडवेंचर टूरिज्म का भी बड़ा केंद्र*
आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा न सिर्फ धार्मिक आस्था से जुड़ी है, बल्कि यह सैलानियों को प्रकृति को बेहद करीब से निहारने का अवसर भी देती है। यही वजह है कि अब धार्मिक यात्रियों के साथ-साथ बड़े पैमाने पर एडवेंचर टूरिज्म (साहसिक पर्यटन) के शौकीन भी इस सीमांत क्षेत्र का रुख कर रहे हैं।

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