उत्तराखंड में महा-मॉकड्रिल, अल्मोड़ा में परखी गई आपदा की तैयारियां
उत्तराखंड में महा-मॉकड्रिल, अल्मोड़ा में परखी गई आपदा की तैयारियां की दस्तक के साथ ही उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ जाता है। इसी से निपटने और प्रशासनिक तैयारियों को परखने के लिए आज प्रदेशभर में एक बहुत बड़ा महा-अभियान चलाया गया। उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों के 66 संवेदनशील स्थानों पर एक साथ मेगा मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इसी कड़ी में अल्मोड़ा जिले में भी आपदा विभाग और जिला प्रशासन ने मिलकर 6 अलग-अलग जगहों पर हाई-लेवल मॉक ड्रिल की, ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।
अल्मोड़ा की 6 लोकेशंस पर बनाई गई ‘सच्ची आपदा’ जैसी परिस्थितियां
आज यानी 2 जुलाई को जिला प्रशासन द्वारा जिले के 6 अलग-अलग ब्लॉकों में वास्तविक आपदा जैसी परिस्थितियां (सिचुएशंस) खड़ी की गईं। इसमें शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ केंद्रीय एजेंसियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
यहाँ भारी भूस्खलन और सड़क बंद होने की परिस्थिति बनाई गई।
रानीखेत (इंदिरा बस्ती)भूस्खलन की स्थिति में रेस्क्यू ऑपरेशन का ट्रायल हुआ।
द्वाराहाट (सलना गांव) और लमगड़ा (कनरा गांव): यहाँ ‘बादल फटने’ (Cloudburst) जैसी भयावह स्थिति में राहत कार्य को परखा गया।
सड़क हादसे (बस एक्सीडेंट) के बाद त्वरित रिस्पांस का लाइव डेमो हुआ।
प्रसिद्ध धार्मिक स्थल जागेश्वर में भारी भीड़ के दौरान ‘क्राउड मैनेजमेंट’ (भीड़ नियंत्रण) का अभ्यास किया गया। क्वारब मॉक ड्रिल पुलिस लाइन बना ‘स्टेजिंग एरिया’, डॉक्टरों ने संभाला मोर्चा*
विशेष रूप से क्वारब में हुई मॉक ड्रिल के लिए अल्मोड़ा की पुलिस लाइन को ‘स्टेजिंग एरिया’ बनाया गया था। जैसे ही क्वारब में भूस्खलन और रास्ता बंद होने की सूचना मिली, पूरा प्रशासनिक अमला तुरंत एक्टिव हो गया।
इस दौरान घटना स्थल से रेस्क्यू कर लाए गए घायलों को तुरंत स्टेजिंग एरिया (पुलिस लाइन) लाया गया, जहाँ डॉक्टरों की एक विशेष टीम ने मोर्चा संभाला हुआ था। मेडिकल टीम द्वारा घायलों को तत्काल प्राथमिक उपचार दिया गया और गंभीर रूप से घायल डमी मरीजों को आगे रेफर करने की कमान संभाली। डॉक्टरों और आपदा विभाग की इस मुस्तैदी ने साबित किया कि जिले का रिस्पांस टाइम बेहद मजबूत है।
मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य
इस महा-मॉकड्रिल का मुख्य उद्देश्य मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटना, अलग-अलग विभागों (जैसे- पुलिस, सेना, स्वास्थ्य विभाग, और आपदा प्रबंधन) के बीच आपसी समन्वय को मजबूत करना और अपने रिस्पांस सिस्टम की कमियों और ताकतों को बारीकी से परखना था।
शासन से लेकर जिला स्तर तक के आला अधिकारियों की मौजूदगी में हुई इस मॉक ड्रिल से साफ है कि प्रशासन इस बार मानसून की चुनौतियों से दो-दो हाथ करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
उत्तराखंड के 13 जनपदों में 66 स्थानों पर एक साथ मेगा मॉक ड्रिल।
अल्मोड़ा जनपद में 6 संवेदनशील स्थानों पर परखी गई आपदा की तैयारियां।
क्वारब में लैंडस्लाइड तो द्वाराहाट और लमगड़ा में बादल फटने की परिस्थितियों पर हुआ अभ्यास।
अल्मोड़ा पुलिस लाइन बना स्टेजिंग एरिया, डॉक्टरों की टीम ने घायलों का किया त्वरित उपचार।
मानसून से पहले केंद्रीय एजेंसियों और वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में परखा गया आपदा रिस्पांस सिस्टम।