Uttrakhand News :खेत बचाओ अभियान के तहत जोशीमठ के मेरग, परसारी एवं मलारी गांवों में कृषक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
खेत बचाओ अभियान के तहत जोशीमठ के मेरग, परसारी एवं मलारी गांवों में कृषक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
भाकृअनुप – विवेकानन्दक पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थाान, अल्मोड़ा द्वारा राष्ट्रव्यापी प्रमुख कार्यक्रम “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत संस्था़न के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त के मार्गदर्शन में चल रहे कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों के एक दल द्वारा 08 जून 2026 को जनपद चमोली के जोशीमठ विकासखंड के मेरग, परसारी एवं मलारी गांवों में “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत कृषक जागरूकता कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा सरकार समर्थित कृषि विकास योजनाओं के प्रति जागरूक करना था। इस अभियान के तहत मेरग एवं परसारी गांवों में आयोजित कार्यक्रमों में कुल 104 किसानों (37 पुरुष एवं 67 महिला कृषक) ने भाग लिया, जिन्हें वैज्ञानिकों द्वारा मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, कृषि भूमि संरक्षण, संसाधनों के दक्ष उपयोग, जलवायु अनुकूल कृषि, संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा परीक्षण तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन के महत्व से अवगत कराया गया; साथ ही उन्हें दलहनी एवं तिलहनी फसलों को फसल चक्र में शामिल करने, जैविक व प्राकृतिक खेती अपनाने तथा गोबर की खाद, कम्पोस्ट, वर्मीकम्पोस्ट और जैव उर्वरकों जैसे पर्यावरण अनुकूल आदानों के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया।
इसी क्रम में, मलारी गांव में आयोजित किसान गोष्ठी में 106 किसानों (29 पुरुष एवं 77 महिला कृषक) ने सहभागिता की, जहां उन्हें मृदा स्वास्थ्य और मृदा परीक्षण आधारित एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन की जानकारी देने के साथ-साथ तिलहनी फसलों के महत्व, खाद्य तेल की खपत के प्रति जागरूकता तथा अतिरिक्त आय के स्रोत के रूप में हींग की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया और संस्थान की ओर से सब्जी बीजों का वितरण भी किया गया। तीनों कार्यक्रमों में जैविक एवं प्राकृतिक कृषि के माध्यम से टिकाऊ उत्पादन बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया और इसके बाद आयोजित संवाद सत्र में किसानों ने बंदर, जंगली सूअर, भालू एवं साही से फसल क्षति, राजमाश, टमाटर, शिमला मिर्च, पत्तेदार सब्जियों व समशीतोष्ण फलों की उन्नत किस्मों की उपलब्धता तथा फसल सुरक्षा हेतु फेंसिंग व छोटे पॉलीहाउस की आवश्यकता जैसे गंभीर मुद्दे उठाए, जिनका वैज्ञानिकों द्वारा त्वरित व्यावहारिक समाधान सुझाया गया।
कार्यक्रम के अंत में वैज्ञानिकों ने किसानों से संतुलित उर्वरीकरण अपनाने, दलहनी-तिलहनी फसलों के विस्तार और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को समाहित करने की अपील की; इस पूरे प्रक्षेत्र अभियान में संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. निर्मल हेडाउ, डॉ. पंकज मिश्रा, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. रविशंकर सिंह, डॉ. अमित कुमार एवं डॉ. उत्कर्ष कुमार ने किसानों से सीधा संवाद कर उनकी कृषि संबंधी समस्याओं का प्रभावी समाधान प्रस्तुत किया।