उत्तराखंड प्रेस क्लब अल्मोड़ा ने शनिवार को हिन्दी पत्रकारिता दिवस मनाया
हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर उत्तराखंड प्रेस क्लब अल्मोड़ा में गोष्ठी प्रो देव सिंह पोखरिया ने 200 की यात्रा पर प्रकाश डाला
अल्मोड़ा। उत्तराखंड प्रेस क्लब अल्मोड़ा ने शनिवार को हिन्दी पत्रकारिता दिवस मनाया। क्लब के सभागार में इसको लेकर आयोजित संगोष्ठी के मुख्य अतिथि हिन्दी व कुमाउनी के जानेमाने साहित्यकार कुमाऊं विवि के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो देव सिंह पोखरिया रहे।
उन्होंने अपने सारगर्भित संबोधन में हिन्दी पत्रकारिता के 200 साल की गौरवशाली यात्रा के विषय में विस्तार से प्रकाश डाला। कहा कि यह यात्रा बेमिसाल रही है। उन्होंने कहा कि उदंत मार्तंड से शुरू हुई यह गौरवशाली यात्रा में महान संपादकों व बड़ी तादात में पत्रकारों का योगदान रहा। स्वाधीनता संग्राम से लेकर इसके बाद भी देश के लोकतंत्र को मजबूत बनाने में में हिन्दी मीडिया की अहम भूमिका रही है। प्रो पोखरिया ने 14 वीं सदी में प्रिटिंग प्रेस के आविष्कार से लेकर 18 वीं के उत्तरार्ध तक के सफर को रखा।
कहा कि कानपुर के जुगल किशोर शुक्ल ने 1826 में आज ही के दिन उदंत मार्तंड साप्ताहिक से हुई हिन्दी पत्रकारिता की शुरूआत की। कहा कि 79 अंक तक छपे इस साप्ताहिक पत्र का शीर्षक की अपने तेवर को बताने के लिए काफी है। उन्होंने महावीर प्रसाद द्विवेदी सहित अन्य विद्वानों को याद करते हुए कहा कि हिन्दी पत्रकारिता ने भाषा के परिमार्जन में अहम भूमिका निभाई। अल्मोड़ा जैसे पहाड़ी क्षेत्र से उस दौर में अल्मोड़ा अखवार शक्ति स्वाधीन प्रजा तथा समता जैसे हिन्दी के अखवारों ने इस यात्रा में अहम भूमिका निभाई।
प्रो पोखरिया ने कहा कि सोशल मीडिया के युग में हिन्दी पत्रकारिता को एक बड़ा संसार मिला है। वर्तमान के हिन्दी पत्रकारों क उदंत मार्तंड से शुरू हुई चिंगारी को कायम रख कर समाज के हित में इसका अधिकाधिक उपयोग करना होगा। गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रेस क्लब के अध्यक्ष जगदीश जोशी ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि विषय परिस्थितियों में हिन्दी के पत्रकार जनपक्षीय पत्रकारिता जारी रखेंगे।
संचालन सचिव अशोक पांडे ने किया। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार पीसी तिवारी सुरेश तिवारी हरीश चंद्र भंडारी संतोष बिष्ट कपिल मल्होत्रा किशन जोशी संजय अग्रवाल अमित उप्रेती रोहित भट्ट दिनेश भट्ट जगजीवन सिंह बिष्ट हर्ष वर्धन पांडे शुभम जोशी दयाकृष्ण कांडपाल हेमराज सिंह चौहान आदि ने विचार रखे।