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एंकर : मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आज मौसम ने करवट बदलने का काम किया है। केदारनाथ धाम सहित मद्दमहेश्वर, तुंगनाथ आदि हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बर्फ़बारी हो रही है, जबकि निचले क्षेत्रों में खराब मौसम के कारण शीतलहर चल रही है जिसने ठंड को बढ़ाने का काम किया है। पहाड़ों में लम्बे समय से बारिश और बर्फ़बारी न होने से लोग भारी परेशान थे, अब मौसम के बदलते मिजाज़ से लोगों के चेहरे भी खिल उठे हैं। चमोली जिले में आज सुबह से घने बादल छाए हुये हैं। जबकि ऊंचाई वाले इलाकों और बदरीनाथ धाम में बर्फ की हल्की फुहार देखने को मिल रही है। इसके साथ ही रूप कुंड, हेमकुंड साहिब, फूलों की घाटी, रुद्रनाथ सहित ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हो रही है। बादल छाने व बर्फबारी होने के कारण तापमान में भारी गिरावट आई है। जनपद उत्तरकाशी में लंबे समय के बाद मौसम ने करवट बदली है। जनपद मुख्यालय तथा समस्त तहसील क्षेत्रों में बादल छाये हुये हैं। ऊपरी क्षेत्रों, यमुनोत्री धाम, और गंगोत्री धाम में हल्की बारिश और बर्फ़बारी हो रही है। जहाँ मौसम की बेरूखी के चलते काश्तकारों की नगदी फ़सलों पर काफ़ी नुकसान हो रहा था, वहीं अब मौसम बदलने से काश्तकारों और बागवानी को भी राहत मिलेगी।पहाड़ों की रानी मसूरी की बात करें तो मौसम ने अचानक करवट बदली है। शुक्रवार सुबह से ही शहर और आसपास के इलाकों में हल्की बारिश के साथ बर्फ़ के फ़ुहारे देखने को मिली है, जिससे ठंड में इज़ाफ़ा हो गया है। लंबे समय से शुष्क मौसम झेल रहे मसूरीवासियों और पर्यटकों के चेहरे इस बदलाव से खिल उठे हैं।वहीं मौसम केन्द्र, देहरादून, का कहना है कि बीती रात से ही प्रदेश के सभी ज़िलों में हल्की से मध्यम वर्षा और अत्यधिक ऊँचाई वाले इलाकों में साल 2026 की पहली बर्फ़बारी देखने को मिल रही है। मौसम केन्द्र द्वारा भारी बारिश और बर्फ़बारी को लेकर पहले ही ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून, के निदेशक, डॉक्टर चंद्र सिंह तोमर, ने बताया कि भारी बारिश और बर्फ़बारी के मद्देनज़र उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, एवं पिथौरागढ़ जनपदों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। जबकि देहरादून, टिहरी, हरिद्वार, पौड़ी, व अन्य इलाकों में भी चेतावनी जारी की गई है। वहीं अगले 24 घंटों के बाद कुछ क्षेत्रों में मौसम सामान्य हो जाएगा तो वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में हल्की बारिश बने रहने के आसार हैं।

बाइट – डॉ चंद्र सिंह तोमर, निदेशक, मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून

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