Uttrakhand News :पशुओं के चारे में नहीं हुआ मुनाफा तो नकली दवाई की फैक्ट्री खोल दी,ड्रग इंस्पेक्टर की कार्रवाई पर उठे सवाल

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मुनाफे के चक्कर में लोग किस तरह आमजन के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं, इसका ताजा उदाहरण हरिद्वार जिले में रुड़की स्थित ग्राम मतलबपुर में घर में चल रही नकली फैक्ट्री में सामने आया है।

फैक्ट्री मालिक आरोपित अमित धीमान पहले पशुओं का चारा तैयार करता था। पशुओं के चारे में अधिक मुनाफा न होने के चलते उसने नकली दवाइयों की फैक्ट्री शुरू कर दी। उसका भाई दवाइयों की कंपनी में काम करता है, ऐसे में दवाइयां बनाने का तरीका अमित ने उसी से ही सीखा। उसने चार महीने पहले ही यहां नकली दवा बनानी शुरू की थी, तब से अब तक वह करीब डेढ़ करोड़ से अधिक की नकली दवाइयां बनाकर सप्लाई कर चुका है।

💠पशुओं का चारा सप्लाई करते हुए उसके पंजाब व हरियाणा के सप्लायरों से अच्छी पहचान हो गई थी, इसलिए उसने सप्लायरों से एंटीबायोटिक दवाइयों के ऑर्डर लेने शुरू कर दिए और चार महीने में ही वह बड़ा सप्लायर बन गया।

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💠40 लाख रुपये की दवाइयां सप्लाई करता था

आरोपित अमित धीमान एक महीने में करीब 40 लाख रुपये की दवाइयां सप्लाई करता था। अमित ने फैक्ट्री में दो मशीनें लगाई थीं। इनमें एक मशीन में दवाइयों के प्रिंट तैयार हो रहे थे, जबकि दूसरी में कच्चे माल से दवाइयां तैयार की जा रही थीं।

आरोपी फैक्ट्री में बुखार व खांसी की नकली एंटीबायोटिक दवाइयां तैयार कर रहा था। उसे पता था कि बरसात के सीजन में बुखार-खांसी के मरीज बढ़ जाते हैं, ऐसे में उसने योजना के तहत ही दवाइयां सप्लाई का काम किया।

एसटीएफ की मानें तो दवाइयां तैयार करने में किसी बड़े गिरोह का हाथ होने की आशंका है, क्योंकि फैक्ट्री दवाइयां बनाने को बड़ी मात्रा में कच्चा माल आता था। यह माल कहां से आ रहा था और अमित का नेटवर्क कहां-कहां फैला था। इसके लिए एसटीएफ उससे पूछताछ कर रही है।

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💠ड्रग इंस्पेक्टर की कार्रवाई पर भी उठे सवाल

एसटीएफ पिछले करीब एक साल हरिद्वार जिले में छह नकली दवाइयों की फैक्ट्री पकड़ चुकी है। एसटीएफ की ओर से लगातार चल रही इस कार्रवाई के बाद ड्रग इंस्पेक्टर की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। दवाइयों की दुकानों की जांच करने की जिम्मेदारी ड्रग इंस्पेक्टर की होती है, लेकिन क्षेत्र में नकली दवाइयों की फैक्ट्री संचालित होने की सूचना ड्रग इंस्पेक्टर तक क्यों नहीं पहुंचती है, यह भी बड़ा सवाल है।