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उत्तराखंड सरकार वृद्ध महिलाओं के लिए एक समग्र और संवेदनशील ढांचा विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। महिला सशक्तिकरण विभाग ने 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं—चाहे वे परिवार के साथ रह रही हों, अकेले हों या किसी संस्था में निवासरत—की वास्तविक जरूरतों को समझकर उन्हें योजनाबद्ध सहायता देने का खाका तैयार करना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में प्रस्तावित “दादी-नानी योजना” के लिए जमीनी स्तर पर संवाद और अनुभव-साझा कार्यक्रमों की शुरुआत की गई है।

महिला सशक्तिकरण मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि अब तक विभाग ने बालिकाओं और महिलाओं के विभिन्न वर्गों के लिए कई योजनाएं चलाई हैं, लेकिन 60 वर्ष से ऊपर की महिलाओं के जीवन-संघर्ष, विशेषकर पति के साथ या पति के विहीन स्थिति में, अलग तरह की चुनौतियां सामने लाते हैं। कई वृद्ध महिलाएं ऐसी हैं जिनके बच्चे होते हुए भी वे अकेलेपन में जीवन बिता रही हैं, जबकि कुछ के पास कोई सहारा नहीं है। ऐसे में सरकार एक “सपोर्टिव सिस्टम” विकसित करने की संभावनाओं पर काम कर रही है।

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संवाद कार्यक्रमों के दौरान सामने आया कि आर्थिक पहलू एक बड़ा कारक है। समाज कल्याण विभाग से पेंशन मिलने के बावजूद स्वास्थ्य परीक्षण, अटेंडेंट या केयरटेकर की जरूरत, दवाइयों और यहां तक कि मोबाइल जैसे छोटे खर्च भी कई बार बोझ बन जाते हैं। स्वास्थ्य सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता के साथ-साथ भावनात्मक जुड़ाव की आवश्यकता भी स्पष्ट रूप से उभरकर आई है।

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मंत्री ने कहा कि वृद्ध महिलाएं चाहती हैं कि समाज से लोग समय-समय पर उनसे मिलें, उनका हालचाल पूछें और उन्हें मुख्यधारा से जुड़े होने का एहसास कराएं। इस भावनात्मक संबल को योजना का अहम हिस्सा बनाने पर विचार किया जा रहा है। विभाग इन अनुभवों को शासनादेशों में रूपांतरित कर भविष्य में एक ठोस योजना के रूप में लागू करने की तैयारी में है।

सरकार का लक्ष्य है कि राज्य की वृद्ध महिलाओं को स्वास्थ्य, वित्तीय और भावनात्मक—तीनों स्तरों पर सशक्त बनाया जाए, ताकि हर नागरिक उनके साथ खड़ा होने का भरोसा महसूस करा सके।बाइट: रेखा आर्य ,महिला सशक्तिकरण मंत्री उत्तराखंड

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