पितृ विसर्जन अमावस्या: ज्योली गौशाला में श्रद्धालुओं ने किया गौग्रास दान, पितरों के प्रति जताई कृतज्ञता
पितृ विसर्जन अमावस्या: ज्योली गौशाला में श्रद्धालुओं ने किया गौग्रास दान, पितरों के प्रति जताई कृतज्ञता
अल्मोड़ा। पितृ पक्ष की विसर्जन अमावस्या के पावन पर्व पर शोले, कटारमल के समीप ज्योली स्थित गौशाला में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने अपने दिवंगत पूर्वजों का पुण्य स्मरण करते हुए गौग्रास दान किया और गौसेवा के माध्यम से पितरों के प्रति अपनी श्रद्धा व कृतज्ञता समर्पित की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गौसेवा न्यास के सचिव दयाकृष्ण काण्डपाल ने कहा कि वैदिक सभ्यता में गोवंश को सर्वोपरि स्थान प्राप्त है। गौसेवा भारतीय संस्कृति, करुणा और परोपकार की भावना का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में गौग्रास दान का विशेष महत्व है, जिसके माध्यम से लोग अपने पितरों की स्मृति को नमन करते हुए निराश्रित गोवंश के संरक्षण में बहुमूल्य योगदान दे सकते हैं।
सचिव काण्डपाल ने जानकारी दी कि ज्योली गौशाला विगत 17 वर्षों से निरंतर बेसहारा व निराश्रित गोवंश को आश्रय देने, उनके उपचार और भरण-पोषण का सेवा कार्य कर रही है। उन्होंने संपूर्ण समाज से गौसेवा के इस पवित्र अभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
गौसेवा न्यास ने की सहयोग की अपील गौसेवा न्यास ने आम जनता, दानदाताओं और समाजसेवियों से गौशाला में रह रहे बेसहारा गोवंश के लिए हरे चारे, भूसे, पेयजल, चिकित्सकीय देखभाल व अन्य व्यवस्थाओं के लिए यथासंभव सहयोग करने की अपील की है। न्यास ने कहा कि गौसेवा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवदया और सामाजिक उत्तरदायित्व का पर्याय है। कोई भी श्रद्धालु चारा, खाद्य सामग्री या स्वेच्छा से आर्थिक योगदान देकर इस पुनीत कार्य का भागीदार बन सकता है।
इस अवसर पर गौसेवा न्यास के वरिष्ठ सहयोगी पूरन चन्द्र तिवारी, चन्द्रमणि भट्ट, यशवन्त परिहार, गोविन्द बल्लभ जोशी, राजेश काण्डपाल, रमेश जोशी, आर्य समाज के प्रधान दिनेश तिवारी, मोहन सिंह रावत, गौरव भट्ट, सुखलाल, बी.बी. पन्त तथा बद्री विशाल अग्रवाल सहित दर्जनों श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सभी उपस्थित लोगों ने निराश्रित गोवंश के संवर्धन और संरक्षण के संकल्प को दोहराया।